- अस्पताल पहुंचे; एक फोन के बाद बदले सुर, जांच के घेरे में ठेकेदार
इटारसी। शहर एमजीएम कॉलेज के बी ब्लॉक में चल रहे एक प्रशिक्षण शिविर में शामिल छात्रों के स्वास्थ्य के साथ बड़े खिलवाड़ का मामला सामने आया है। सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए सौर संकल्प अभियान के तरत 45 दिन का प्रशिक्षण सत्र नर्मदापुरम जिले के इटारसी में आयोजित किया गया है। रविवार रात करीब 10 बजे कथित दूषित भोजन (फूड पॉइजनिंग) के कारण पांच प्रशिक्षणार्थी छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिन्हें आनन-फानन में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शाम को छात्र रीतेश यादव विवेक गौर रोहित यादव विवेक केवट जतिन पटवा द्वारा खाने के बाद उनमें उल्टी ओर डिहाइड्रेशन के लक्षण के बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जिसमें चार छात्रों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी वही एक छात्र की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उसे भर्ती कर लिया गया है। छात्रों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में उस समय एक संदिग्ध मोड़ आ गया, जब अस्पताल में पहले ठेकेदार पर बदबूदार खाना देने का आरोप लगाने वाले छात्रों के सुर एक रहस्यमयी फोन आने के बाद अचानक बदल गए। यह मुख्यमंत्री मोहन यादव की एक महत्वाकांक्षी योजना है और इस योजना में इस तरह की गड़बड़ी से जाहिर होता है कि अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
6 दिन से मिल रहा था बदबूदार खाना, ठेकेदार ने नहीं सुनी
अस्पताल में भर्ती पीडि़त छात्रों ने शुरुआत में बताया कि उन्हें पिछले छह दिनों से लगातार दूषित और घटिया स्तर का खाना परोसा जा रहा था। वे इसकी शिकायत लगातार कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। रविवार रात 8 बजे जब खाना मिला, तो दाल से बदबू आ रही थी। छात्रों ने जब इसकी शिकायत भोजन का ठेका लेने वाले ठेकेदार से की, तो उसने साफ तौर पर अनसुना कर दिया। इसे खाने के बाद छात्रों की तबीयत बिगडऩे लगी।
निरीक्षण के दिन अच्छा खाना, बाकी दिन लापरवाही
छात्रों ने व्यवस्था की पोल खोलते हुए यह भी बताया कि प्रशिक्षण के दौरान जब भी कोई जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण (विजिट) पर आता है, तो उस दिन खाने की गुणवत्ता में अचानक सुधार कर दिया जाता है और अच्छा खाना परोसा जाता है। लेकिन जैसे ही अधिकारी वहां से रवाना होते हैं, खाने का स्तर फिर से बेहद घटिया और दोयम दर्जे का कर दिया जाता है।
एक फोन कॉल और बदल गए छात्रों के बयान!
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवालिया निशान तब खड़ा हुआ, जब अस्पताल में मीडिया और डॉक्टरों के सामने ठेकेदार की लापरवाही उजागर करने वाले छात्रों के सुर अचानक बदल गए। बताया जा रहा है कि घटना के कुछ देर बाद छात्रों के पास कहीं से एक फोन आया। उस कॉल के बाद छात्र कहने लगे कि शायद पानी पीने से तबीयत खराब हुई थी, सिर्फ चक्कर आए थे।
बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह फोन किसका था? पहले खाने में गड़बड़ी का खुलकर आरोप लगाने वाले छात्र किसके दबाव में आकर अपने बयान बदलने को मजबूर हुए? क्या व्यवस्था की कमियों और ठेकेदार की लापरवाही को छिपाने के लिए बीमार छात्रों पर प्रशासनिक या अन्य कोई दबाव बनाया जा रहा है?
यह मामला सीधे तौर पर युवाओं के स्वास्थ्य और सरकारी व्यवस्थाओं की शुचिता से जुड़ा है। जिम्मेदार अधिकारियों को इस रहस्यमयी फोन कॉल और खाने के ठेकेदार की लापरवाही की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी छात्र की जान जोखिम में न पड़े।
ड्यूटी डॉक्टर का बयान
रात करीब दस बजे पांच प्रशिक्षणार्थी छात्रों को अस्पताल लाया गया था। उन्हें पेट दर्द और लगातार उल्टी की शिकायत थी। शुरुआत में छात्रों ने स्पष्ट तौर पर खाने में गड़बड़ी और दूषित भोजन मिलने की शिकायत की थी। सभी का उपचार किया जा रहा है।
— डॉ. विकास जैतपुरिया, ड्यूटी डॉक्टर, शासकीय अस्पताल











