- लेखक : पंकज पटेरिया (भोपाल)

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री, फायरब्रांड भाजपा नेत्री और जन-जन की लोकप्रिय नेता सुश्री उमा भारती इन दिनों एक बार फिर देश की राजनीति और चर्चाओं के केंद्र में हैं। उमा जी का व्यक्तित्व ऐसा है कि वे अपनी वेशभूषा के कारण नहीं, बल्कि अपनी ईमानदार दृष्टि, चौकस स्वभाव और जनता से जीवंत जुड़ाव के कारण सदैव लाइमलाइट में बनी रहती हैं।
विरोध का अनोखा अंदाज
हालिया घटनाक्रम टीकमगढ़ का है, जहां उमा भारती ने सड़क किनारे पोहा-जलेबी की दुकान खोलकर प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। दरअसल, यह विरोध उन गरीब दुकानदारों के समर्थन में है, जिनकी छोटी-छोटी दुकानों को प्रशासन ने अतिक्रमण के नाम पर हटा दिया था। बुंदेलखंड में जिज्जी के नाम से पुकारी जाने वाली साध्वी उमा भारती की शैली हमेशा से अलहदा रही है। जब वे जनहित के मुद्दे पर उतरती हैं, तो पद और प्रतिष्ठा की सीमाएं उन्हें रोक नहीं पातीं।
बालपन से नेतृत्व तक का सफर
11 वर्ष की अल्पायु से प्रवचन करने वाली उमा जी का आध्यात्मिक और राजनीतिक सफर अत्यंत प्रभावशाली रहा है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया के मार्गदर्शन में राजनीति में प्रवेश करने वाली उमा भारती ने साल 2003 में भाजपा को भारी बहुमत दिलाकर मध्य प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी पर उनकी समान पकड़ है और उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं।
मुझे याद है जब वे प्रवचन देने नर्मदापुरम आई थीं, तब मैंने उनके ओजस्वी विचारों को सुना और पत्रकार के नाते उन्हें कवर भी किया था। उनका मां नर्मदा के प्रति अगाध प्रेम जगजाहिर है। नर्मदा और तवा के संगम ‘बांद्राभान’ स्थित अपनी गुरु माता की समाधि से उनका गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव है।
तेवर जो सत्ता को हिला दें
उमा भारती केवल सत्ता का चेहरा नहीं रहीं, बल्कि वे अपनी ही पार्टी की नीतियों पर अंगुली उठाने से भी कभी पीछे नहीं हटीं। उनके राजनीतिक इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं।
- शराबबंदी : राजधानी की सड़क पर शराब दुकान के सामने कुर्सी डालकर बैठना और पत्थर फेंककर विरोध जताना।
- सम्मान की लड़ाई : नई दिल्ली में एक अखबार द्वारा गलत कैप्शन छापे जाने पर दफ्तर के गेट पर धरना देना, जो अखबार द्वारा क्षमा याचना के बाद ही समाप्त हुआ।
- सिद्धांतों के लिए त्याग : असहमति होने पर पद त्याग कर बद्रीकाश्रम चले जाना या अपनी अलग पार्टी बनाना।
पोहा, राजनीति और लोकप्रियता
दिलचस्प बात यह है कि पोहा की लोकप्रियता अब सातवें आसमान पर है। इंदौर से शुरू हुआ पोहा-जलेबी का सफर अब वैश्विक हो चुका है और हर साल 7 जून को ‘विश्व पोहा दिवस’ भी मनाया जाता है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पोहा के प्रति अपना प्रेम व्यक्त कर चुके हैं। अब उमा जी द्वारा विरोध स्वरूप खोली गई इस दुकान ने पोहा की चर्चा में चार चांद लगा दिए हैं।
उमा भारती एक सच्ची राष्ट्रभक्त हैं जो गलत नीति के खिलाफ अपनी पार्टी को भी कटघरे में खड़ा करने का साहस रखती हैं। टीकमगढ़ की यह ‘पोहा दुकान’ महज एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि यह प्रशासन के लिए एक कड़ी चेतावनी और गरीबों के हक की लड़ाई है। देखना यह है कि उमा जी का यह ‘पोहा सत्याग्रह’ आने वाले समय में राजनीति में क्या नया रंग खिलाता है।











