- धान की कटी और खड़ी फसल बर्बाद, खाद के बाद अब ‘नरवाई’ बनी नई आफत, किसान बोले- रबी की बुआई कैसे करें?
इटारसी/नर्मदापुरम। चक्रवाती तूफान ‘मोंथा, के कारण मध्य प्रदेश में हुई बेमौसम की बारिश ने किसानों पर दोहरी मार की है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी और कटी पड़ी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल गई है।
खेतों में गिरी धान, मशीनें भी हारी

इटारसी के पास चांदोन गांव से किसानों की दर्दनाक कहानी सामने आई है। किसान परसराम राय और जीतू राय ने बताया कि तेज बारिश और तूफानी हवाओं ने उनकी धान की फसल को जड़ से उखाड़ दिया है और बालियां खेतों में बिछ गई हैं।
परसराम राय ने बताया, ‘धान पूरी तरह से जमीन पर गिर गई है। अब हालात ये हैं कि हार्वेस्टर मशीनें भी इसे उठा नहीं पा रही हैं। मशीन के ब्लेड नीचे से नहीं काट पा रहे, जिससे फसल का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो रहा है और हम इसे बाजार तक नहीं पहुंचा पाएंगे।’ किसानों का कहना है कि धान को अब मजदूरों की मदद से उठाना पड़ेगा, जिसमें लागत बहुत बढ़ जाएगी और जो फसल हाथ लगेगी, उसकी गुणवत्ता भी खराब हो जाएगी।
खाद की मार के बाद पराली की आफत
सनखेड़ा इटारसी निवासी किसान परसराम सराठे ने अपनी समस्या को विस्तार से बताते हुए कहा कि बेमौसम बारिश से हुए इस नुकसान के अलावा, अब किसानों के सामने रबी की फसल गेहूं और चना बोने की चुनौती खड़ी हो गई है। परसराम सराठे ने कहा, ‘हम पहले से ही बुवाई के समय खाद (यूरिया/डीएपी) की कमी और ऊंचे दामों से परेशान थे। अब धान की फसल बर्बाद हुई, ऊपर से नरवाई (पराली) जलाने पर लगे प्रतिबंध ने हमारी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
उनका कहना है कि खेतों में बिछी हुई और गीली पराली को बिना जलाए हटाना एक जटिल और महंगा काम है। ऐसे में समय पर खेत खाली नहीं हो पाएंगे, जिससे रबी फसल गेहूं, चना आदि की बुवाई में देरी होगी और पैदावार कम हो जाएगी।
किसानों ने शासन-प्रशासन से इस गंभीर संकट को देखते हुए फसल क्षति का तत्काल सर्वे कराने और किसानों को उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।








