- अखिलेश शुक्ल, सेवा निवृत्त प्राचार्य, लेखक, ब्लॉगर

“आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर, सबको मालूम है और सबको खबर हो गई…” ये बोल सुनते ही आपके पैर थिरकने लगते हैं, आपके होंठों पर मुस्कान आ जाती है। क्या आपको यकीन होगा कि ये गाना, जो बॉलीवुड के सितारों की जुबान पर है और पीढ़ियों से सदाबहार है, असल में कभी रिजेक्ट कर दिया गया था? न सिर्फ एक, बल्कि दो बार!
तो चलिए, आज हम आपको ले चलते हैं इस क्लासिक गाने के सफर पर, जिसकी यात्रा उतनी ही अनोखी और रोमांचक है जितना की ये गाना खुद।
जब देव साहब को नहीं जमा ये गाना
हाँ, यकीन मानिए या नहीं, लेकिन ये गाना शुरुआत में 1961 की फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ के लिए बना था, जिसमें देवानंद साहब लीड रोल में थे। संगीत के जादूगर शंकर-जयकिशन ने ये धुन तैयार की थी। लेकिन देव साहब को ये गाना अपने किरदार और फिल्म के मूड के हिसाब से थोड़ा ज़्यादा ही उत्साहित (loud) लगा। यूँ तो ये उनका और शंकर-जयकिशन का साथ में काम करने का इकलौता मौका था, फिर भी देव साहब ने कह दिया, “नहीं चलेगा!” और गाना रिजेक्ट हो गया। लेकिन कहीं ना कहीं, किस्मत को इस गाने के साथ कुछ और ही खेलना था।
पांच साल और एक और “ना”
इस रिजेक्शन के पांच साल बाद, सन् 1966 में, ये गाना फिर से सामने आया। फिल्म ‘सूरज’ थी, म्यूजिक फिर शंकर-जयकिशन का, और हीरो थे राजेंद्र कुमार। जब ये धुन राजेंद्र कुमार को सुनाई गई, तो उनका जवाब भी ‘ना’ ही था। उन्हें लगा कि ये गीत उनकी स्क्रीन इमेज से मेल नहीं खाता। सात सालों तक ये गाना रिजेक्टेड गानों की लिस्ट में पड़ा रहा।
शम्मी कपूर की मैजिकल एंट्री
फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। पहले निर्माताओं ने ये फिल्म शम्मी कपूर को ऑफर की, लेकिन जब उनसे तुरंत जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने ये फिल्म राजेंद्र कुमार को दे दी। राजेंद्र कुमार ने फिल्म साइन कर ली, शम्मी कपूर को इसका पता चला तो वो सीधे राजेंद्र कुमार के घर पहुंचे और उनसे गुज़ारिश की कि वो ये फिल्म छोड़ दें। राजेंद्र कुमार भी तैयार हो गए और शम्मी कपूर ने ब्रह्मचारी की लीड रोल हासिल कर ली।
ब्लफमास्टर से ब्रह्मचारी तक का सफर
शम्मी कपूर जब रिहर्सल कर रहे थे, तो संगीतकार जयकिशन ने उन्हें मायूसी में ये धुन सुनाई। शम्मी साहब खुद इसके कायल हो गए। उन्होंने फिल्म ब्लफमास्टर में इस गाने का इस्तेमाल करना चाहा। निर्देशक मनमोहन देसाई ने पहले हाँ कर दी, लेकिन बाद में ये कहकर मना कर दिया कि उनके पास इसे शूट करने के लिए पैसे नहीं हैं। ये बात शम्मी जी के लिए एक निराशा की तरह थी।
कलर्ड टेक्नोलॉजी में अमर हो गया गाना
फिर शम्मी कपूर ये गाना लेकर निर्माता जी.पी. सिप्पी के पास पहुँचे। सिप्पी साहब ने तुरंत मान लिया और ब्रह्मचारी में इसे शामिल किया। संयोग से ब्रह्मचारी एक कलर्ड फिल्म थी, जबकि ब्लफमास्टर ब्लैक एंड व्हाइट थी।
इस मास्टरपीस को पर्दे पर उतारा शम्मी कपूर और मुमताज ने। कहा जाता है कि शम्मी कपूर ने कभी कोरियोग्राफर के साथ काम नहीं किया और अपने सारे स्टेप्स खुद ही बनाए। आज भी ये गाना उनकी अनोखी शैली और ऊर्जा का सबसे बड़ा प्रमाण है।
संगीत के अनछुए पहलू
- · आवाज़ का कमाल: शुरुआत में लगता है ये लता मंगेशकर जी की आवाज़ है, लेकिन असल में ये सुमन कल्याणपुर जी का गाया अमर गीत है, जिनकी आवाज़ बेहद मिलती थी।
- · इंडस्ट्री का जलवा: बॉलीवुड के तीन बड़े कलाकार – देवानंद, राजेंद्र कुमार और शम्मी कपूर – इस एक गाने के सफर का हिस्सा रहे।
- · पुरस्कारों की बरसात: गाने को ‘ब्रह्मचारी’ में रखा गया, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहा और सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। ब्रह्मचारी ने 6 फिल्मफेयर अवार्ड्स भी जीते थी!
निष्कर्ष
जब ब्लफमास्टर में ये गाना नहीं लिया गया, तो शम्मी कपूर ने कहा था, “अच्छा हुआ मनमोहन देसाई ने मना कर दिया!” और वाकई में, रंगीन फिल्म ब्रह्मचारी ने इस गाने को दिव्य बना दिया। आखिरकार, ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि ज़िद, संयोग और सौभाग्य की कहानी है। अगले प्यार के मौके पर याद रखिए, अस्वीकृति का मतलब ये नहीं कि आप कम हैं; शायद इंतज़ार आपके लिए किसी और बेहतर, किसी और रंगीन मौके का हो रहा है।
फिर से एक बार इस गाने को सुनिए और बोलिए, “अच्छा! तो क्या…?”











