एक पुण्य संस्मरण : इटारसी आए जब अटल जी…!

एक पुण्य संस्मरण : इटारसी आए जब अटल जी…!

– पंकज पटेरिया :
बचपन की बात है कौन सा सन था, यह भी याद नहीं। याद है तो इतना कि थाने के पास की एक स्टेशनगंज प्राइमरी स्कूल में शायद दूसरी या तीसरी कक्षा में पढ़ता था। यहा मैं सुबह और शाम जब शाखा जाता था, मेरे बड़े भाई जो स्वयंसेवक थे, वे भी जाते थे। तिलक शाखा नाम था। खेलना-कूदना, लाठी चलाना, राष्ट्र प्रेम, बलिदान, त्याग की प्रेरक कथाएं, गीत और अनुशासन की बातें सीखते थे। आदरणीय स्व. सुख्खु भैया, विधायक रहे नर्मदा प्रसाद सोनी, स्व. लीलाधर अग्रवाल, चन्ने भैया, इंगले चाचा, रामशंकर, गया भैया आदि आकर बच्चो का उत्साह बढ़ाते थे। “मातृभूमि, पितृभूमि, धर्मभूमि महान, भरत-भू महान है, महान है महान।” यह गीत मैं अक्सर गाता था। बहरहाल तभी ज्ञात हुआ गांधी ग्राउंड के ठीक बाजू का जो खाली मैदान जहां कभी बब्बू भैया रामलीला कराते थे, वहां खूब साज-सज्जा हो रही थी, दीपक का बहुत बड़ा स्टेज बना था।
हम बच्चे स्व. प्रकाश सोनी, लेखराज, हरबन्द, सीताराम, उमा आदि दिन भर उस मैदान में डोलते रहते और अपने मन से छुटपुट काम भी करते। बाल बुद्धि से इतना ही जान पाए कि देश के कोई बहुत बड़े आदमी जिनकी बहुत बड़ी तस्वीर लगी थी, नाम ‘श्री अटल बिहारी वाजपेयी’ यहां आ रहे हैं। यह बहुत सुंदर तस्वीर मेरे बड़े भाई के मित्र हरीवल्लभ भैया ने बनाई थी। जिस दिन अटल जी आए, हम बच्चे भी गणवेश में सज धजकर मैदान में पहुंच गए थे और प्रवेश द्वार के सामने सावधान मुद्रा में खड़े हो गए थे। कुछ देर बाद आदरणीय परमानन्द दादा, सरताज भैया आदि लोगो के साथ जैसे ही अटल जी आए, गगनभेदी नारों से आसमान गूंज उठा। हम बच्चो को प्यार दुलार देते अटल जी मंच पर पहुंचे और जोशीला भाषण दिया। याद नहीं पर हम बच्चे वैसा बोलते, अभिनय कर बहुत खुश होते थे। कार्यक्रम के बाद अटल जी सरताज जी के घर भोजन करने गए थे। हमे भी नाश्ता दिया गया था। लेकिन बाल मन को सबसे ज्यादा खुशी दीपक की आकृति वाले एक बिल्ले को पाकर हुई थी, जिसे जाने कब तक सीने से लगाए घूमता रहता था।
अटल जी की स्मृति को प्रणाम।


पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार/ कवि
संपादक: शब्द ध्वज
9893903003, 9407505651

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