- अखिलेश शुक्ल, सेवा निवृत्त प्राचार्य, लेखक, ब्लॉगर

“क्यों धरम जी का नाम खराब कर रहे हो? तुम फ़िल्मों में काम करने लायक ही नहीं हो सनी।” ये वाक्य सुनकर शायद ही किसी को लगेगा कि ये किसी ने सनी देओल जैसे स्टार से कहा हो। मगर ये सच है। ये कड़े शब्द थे मौसमी चटर्जी के, और ये घटना है फिल्म ‘घायल’ की शूटिंग के दौरान की।
इस साल ‘घायल’ ने अपने रिलीज़ के 35 साल पूरे कर लिए हैं । 22 जून 1990 को रिलीज़ हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था और सनी देओल को एक्शन हीरो के रूप में स्थापित कर दिया था। लेकिन इस फिल्म का सफर और इससे जुड़ी कहानियाँ उतनी ही दिलचस्प हैं जितनी फिल्म खुद। तो चलिए, आज हम ‘घायल’ की इन्हीं अनसुनी बातों पर बात करते हैं।
जब सनी पाजी को देख राजकुमार संतोषी ने बना लिया था मन
यह कहानी है उन दिनों की जब राजकुमार संतोषी गोविंद निहलानी साहब के असिस्टेंट डायरेक्टर हुआ करते थे। एक दिन वो ‘अर्जुन’ फिल्म की शूटिंग देखने गए, जिसमें सनी देओल हीरो थे। सनी की एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस ने संतोषी को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने तय कर लिया कि अगर मौका मिला तो वो सनी के साथ जरूर फिल्म बनाएंगे।
आगे चलकर राजकुमार संतोषी ने एक कहानी पर काम शुरू किया। पहले उन्होंने इसके हीरो के तौर पर कमल हासन को सोचा, मगर कोई प्रोड्यूसर पैसे लगाने को तैयार नहीं था। फिर ये कहानी मिथुन चक्रवर्ती तक पहुँची, उन्होंने भी काम करने की इच्छा जताई। मगर एक फाइनेंसर ने संजय दत्त के साथ फिल्म बनाने की बात कही, लेकिन संजय दत्त उन दिनों बहुत व्यस्त थे।
आखिरकार, राजकुमार संतोषी की मुलाकात सनी देओल से हुई और उन्होंने सनी को इस फिल्म के लिए राजी कर लिया। लेकिन एक फाइनेंसर ने शर्त रखी – सनी अपनी फीस कम करें, और अगर फिल्म 100 हफ्तों तक चलती है तो उन्हें 1 लाख रुपए और दिए जाएंगे। बात बनते-बनते रह गई क्योंकि पता चला कि उस फाइनेंसर के पास खुद पैसे नहीं हैं। और यहीं से फिल्म के निर्माण की असली कहानी शुरू होती है।
जब धरम जी ने गले लगाकर दिया आशीर्वाद
राजकुमार संतोषी ने सनी देओल को पूरी बात बताई। सनी उन्हें लेकर राजस्थान पहुँचे, जहाँ ‘बंटवारा’ फिल्म की शूटिंग चल रही थी और उसमें धर्मेंद्र काम कर रहे थे। सनी, संतोषी को अपने पिता से मिलाने ले गए।
धरम जी ने राजकुमार संतोषी की पूरी कहानी ध्यान से सुनी, और वो बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने पूछा कि क्या संतोषी ने कभी यश चोपड़ा या रमेश सिप्पी जैसे बड़े निर्देशकों को असिस्ट किया है। जब संतोषी ने मना किया, तो धरम जी थोड़े निराश हुए – फिर संतोषी ने कुछ ऐसा बताया कि धरम जी ने उन्हें गले लगा लिया। उन्होंने बताया कि वो पी.एल.संतोषी के बेटे हैं।
पी.एल.संतोषी फिल्म इंडस्ट्री के बहुत बड़े लेखक और निर्देशक थे। देव आनंद की डेब्यू फिल्म ‘हम एक हैं’ को उन्होंने ही डायरेक्ट किया था। धरम जी जब संघर्ष के दिनों में थे, तब उनकी मुलाकात पी.एल. संतोषी से हुई थी। इस रिश्ते को याद करके धरम जी ने फैसला लिया – वो खुद इस फिल्म को प्रोड्यूस करेंगे।
जब मौसमी चटर्जी ने सनी को सुना दी थी फटकार
अब बात करते हैं हीरोइन की। सनी देओल चाहते थे कि उनकी हीरोइन डिंपल कपाडिया हों, लेकिन धरम जी ने मना कर दिया क्योंकि उन दिनों सनी-डिंपल के अफेयर की खूब चर्चा थी। फिर श्रीदेवी को सोचा गया, लेकिन वो भी नहीं मिल पाईं। आखिरकार मीनाक्षी शेषाद्री को फिल्म में लिया गया।
एक और दिलचस्प किस्सा है मौसमी चटर्जी का। वो फिल्म में सनी की भाभी बनी थीं। शूटिंग के दौरान सनी अक्सर सेट पर देर से आते थे, जो मौसमी को बिल्कुल पसंद नहीं था। एक दिन जब देर बहुत ज्यादा हो गई तो मौसमी ने खुद सनी के घर जाकर उन्हें खूब डांटा और वही मशहूर वाक्य कहा – “तुम फ़िल्मों में काम करने लायक नहीं हो सनी। क्यों धरम जी का नाम खराब कर रहे हो?”
इस डांट का असर ये हुआ कि सनी ने उनसे माफी माँगी और फिर कभी देर नहीं की। हालाँकि बाद में मौसमी चटर्जी का देओल परिवार से कुछ मनमुटाव हो गया, जिसके चलते उन्हें ‘घायल’ की सफलता पार्टी में इनवाइट नहीं किया गया, और उन्होंने इस पर नाराज़गी भी जताई थी।
जब स्टंट की वजह से डायरेक्टर पर भड़के धरम जी
‘घायल’ के एक्शन सीन्स आज भी याद किए जाते हैं। फिल्म के एक सीन में सनी के पीछे ट्रक लगा दिया जाता है, और वो उससे बचकर भागते हैं। सनी ने ये स्टंट खुद किया, बिना किसी बॉडी डबल के। मगर जब धरम जी ने ये सीन देखा तो उन्हें बहुत गुस्सा आया क्योंकि शूटिंग के दौरान सड़क गीली थी – अगर सनी का पैर फिसल जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
सनी तो फिल्म का आखिरी स्टंट भी खुद करना चाहते थे – क्लाइमैक्स में वो मेले के ऊँचे झूले से कूदते हैं। मगर एक्शन मास्टर भीखू वर्मा ने मना कर दिया। उनके भाई टीनू वर्मा ने ये स्टंट किया, और वो भी बाल-बाल बचे क्योंकि उनका बैलेंस बिगड़ गया और वो सेफ्टी बॉक्सेस के साइड में गिरे – थोड़ी सी गलती होती तो बड़ा हादसा हो जाता।
एक और किस्सा – क्लाइमैक्स में सनी अपने किरदार में इतना खो गए कि उन्होंने अमरीश पुरी की गर्दन इतनी जोर से पकड़ ली कि उनसे साँस लेना मुश्किल हो गया। बाद में सनी को अपनी इस हरकत पर बहुत अफसोस हुआ और उन्होंने अमरीश पुरी से माफी माँगी।
साल 1990 की दूसरी सबसे बड़ी हिट
‘घायल’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा कमाल किया कि वो 1990 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई । फिल्म को 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मिले – बेस्ट फिल्म (धरम जी ने रिसीव किया), बेस्ट एक्टर (सनी देओल), बेस्ट डायरेक्टर (राजकुमार संतोषी), बेस्ट स्टोरी (संतोषी), बेस्ट एडिटर, बेस्ट सिनेमैटोग्राफर और बेस्ट आर्ट डायरेक्टर । 36वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में भी फिल्म को बेस्ट पॉप्युलर फिल्म का अवॉर्ड मिला और सनी देओल को स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिला।
निष्कर्ष
35 साल बाद भी ‘घायल’ की यादें ताज़ा हैं। फिल्म के लोगों को आज भी डायलॉग याद हैं, और सनी देओल के ‘अजय मेहरा’ ने एक्शन हीरो की परिभाषा ही बदल दी । सनी ने खुद इस फिल्म को दिल का टुकड़ा बताते हुए कहा कि ये उनके लिए सिर्फ एक रोल नहीं बल्कि एक भावना है ।
‘घायल’ की कहानी हमें सिखाती है कि कैसे एक अच्छी कहानी, सही इरादे और जुनून के साथ मुश्किलों को पार किया जा सकता है। चाहे वो फाइनेंसर की अनिश्चितता हो, या हीरोइन चुनने की उलझन, या फिर खतरनाक स्टंट्स – ‘घायल’ ने हर बाधा को पार किया और इतिहास रच दिया। और जी हाँ, मौसमी चटर्जी की वो डांट भी इस इतिहास का एक अहम हिस्सा है – जिसने एक स्टार को और भी बेहतर बनने का सबक दिया।











