- अखिलेश शुक्ला
बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी चमचमाती दिखती है, उसके पीछे उतने ही संघर्ष, खतरे और दर्द छिपे रहते हैं। ऐसे ही एक हादसे की कहानी है 1981 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘क्रांति’ की, जिसमें हेमा मालिनी और परवीन बाबी के बीच फिल्माया गया तलवारबाज़ी का सीन अचानक असली जख्म में बदल गया था।
क्रांति फिल्म का यादगार सीन
अगर आपने क्रांति फिल्म देखी है, तो आपको याद होगा वो सीन जिसमें हेमा मालिनी और परवीन बाबी तलवार लेकर आमने-सामने खड़ी थीं। दोनों अद्भुत लुक में, रॉयल ड्रेस पहने, हाथों में तलवारें लिए एक-दूसरे पर वार कर रही थीं। पर्दे पर ये सीन भले ही दिलचस्प लगा हो, लेकिन इसके पीछे एक ऐसी दर्दनाक घटना छिपी थी, जिसे दोनों अभिनेत्रियां जीवनभर भूल नहीं सकीं।
असली तलवारें, असली चोट
उस समय के नामी एक्शन कोरियोग्राफर वीरू देवगन, जो कि अजय देवगन के पिता थे, इस सीन को डायरेक्ट कर रहे थे। उन्होंने सीन की रियलिस्टिक डिमांड के चलते नकली प्लास्टिक तलवारों की बजाय मेटल की तलवारें दीं। हालांकि वे तलवारें उतनी धारदार नहीं थीं, लेकिन फिर भी मेटल की थी और चोट पहुंचा सकती थीं।
सीन में हेमा मालिनी को परवीन बाबी पर तलवार से हमला करना था और परवीन को ढाल से खुद का बचाव करना था। दोनों ही अदाकाराएं पूरी ईमानदारी और गंभीरता से सीन दे रही थीं। पर असली मुसीबत तब आई जब वीरू देवगन बार-बार चिल्लाने लगे –
“हेमा, ज़ोर से मारो। ये सीन स्लो मोशन में नहीं है, असली लगना चाहिए। ज़ोर से वार करो।”
शोर, तनाव और एक पल की चूक
सेट पर मौजूद लोग भी तालियां बजा रहे थे और शोर मचा रहे थे, ताकि एक्शन सीन का माहौल बने। लेकिन इस शोरगुल में हेमा मालिनी और परवीन बाबी का कॉन्संट्रेशन टूट गया। हेमा जी ने जैसे ही परवीन बाबी पर तलवार का वार किया, परवीन समय रहते पीछे नहीं हट पाईं। तलवार सीधा उनकी उंगलियों पर लगी। अगले ही पल सेट पर सन्नाटा छा गया। परवीन बाबी की दो उंगलियों पर गहरे कट लग चुके थे। उनके हाथ से खून बहने लगा।
सेट पर मचा हड़कंप
परवीन बाबी दर्द से कराह उठीं। वहां मौजूद हर इंसान हक्का-बक्का रह गया। फ़िल्म यूनिट के मेंबर्स दौड़ पड़े। तुरंत डॉक्टर्स को बुलाया गया। परवीन बाबी को अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इस हादसे का सबसे गहरा असर पड़ा हेमा मालिनी पर। जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि उनके हाथों से परवीन को इतनी बड़ी चोट लग गई है, वो फूट-फूट कर रोने लगीं।
हेमा मालिनी का भावुक पल
बताया जाता है कि हेमा जी ने खुद को मेकअप रूम में बंद कर लिया और पूरे दिन रोती रहीं। वो खुद को दोष दे रही थीं, बार-बार यही कहती रहीं –
“ये मैंने क्या कर दिया…मैंने उन्हें घायल कर दिया।”
परवीन बाबी को अस्पताल में एडमिट किया गया, जहां उनका इलाज हुआ। डॉक्टरों की टीम ने चार दिन तक उनका इलाज किया और सौभाग्य से उनकी उंगलियां कटने से बच गईं।
परवीन बाबी का बड़ा दिल
जब परवीन बाबी अस्पताल से डिस्चार्ज होकर वापस आईं, तो मीडिया में इस हादसे की खूब चर्चा हुई। लेकिन परवीन बाबी ने इस पूरे मामले को बड़ी सहजता से लिया। उन्होंने खुद बयान दिया –
“इसमें हेमा की कोई गलती नहीं थी। गलती मेरी थी। मैं सही समय पर पीछे नहीं हट सकी। शूटिंग में ऐसा हो जाता है।”
उनका यह बयान हेमा जी के लिए बड़ी राहत लेकर आया। दोनों के रिश्तों में कोई खटास नहीं आई। बल्कि, इस घटना के बाद दोनों और करीब हो गईं।
बॉलीवुड में ऐसे हादसे क्यों होते हैं?
यह सवाल जरूर उठता है कि शूटिंग के दौरान ऐसे एक्सीडेंट क्यों होते हैं। असल में 70-80 के दशक में VFX या CGI जैसी तकनीकें नहीं थी। एक्शन सीन में असली हथियारों का ही प्रयोग होता था। कलाकारों को कई बार बिना बॉडी डबल के स्टंट करना पड़ता था। यही वजह थी कि कई सुपरस्टार्स को शूटिंग के दौरान गंभीर चोटें आईं, जिनमें अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और विनोद खन्ना के हादसे भी शामिल हैं।
हेमा मालिनी और परवीन बाबी – दो मिसालें
हेमा मालिनी को इंडस्ट्री में “ड्रीमगर्ल” कहा जाता है, लेकिन इस घटना से ये भी साबित होता है कि पर्दे पर दिखने वाली खूबसूरती के पीछे कितनी मेहनत और रिस्क छुपा होता है। वहीं परवीन बाबी, जो उस समय ग्लैमर की क्वीन मानी जाती थीं, उन्होंने भी इस हादसे के बाद किसी को दोष नहीं दिया। उनकी यह दरियादिली और प्रोफेशनल एटीट्यूड आज के कलाकारों के लिए भी प्रेरणा है कि फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ चकाचौंध का नाम नहीं, बल्कि जोखिम और धैर्य का दूसरा नाम भी है।
निष्कर्ष
इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि बॉलीवुड के चमकते पर्दे के पीछे कई अनसुनी और दर्दनाक कहानियां छुपी हैं। हेमा मालिनी और परवीन बाबी का यह हादसा हमें बताता है कि फिल्म इंडस्ट्री में हर सीन के पीछे कलाकारों का जुनून, साहस और त्याग छिपा होता है। साथ ही, यह घटना परवीन बाबी के बड़े दिल और हेमा मालिनी की संवेदनशीलता का भी उदाहरण है।
क्या आप भी मानते हैं कि पर्दे के पीछे की ये कहानियां कलाकारों को और भी महान बना देती हैं? अपनी राय जरूर बताएं।
अखिलेश शुक्ला
सेवा निवृत्त प्राचार्य, लेखक ब्लॉगर










