- अखिलेश शुक्ल, सेवा निवृत्त प्राचार्य, लेखक, ब्लॉगर

जब भी हिंदी सिनेमा के महानतम अभिनेताओं का नाम आता है, तो प्राण साहब का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। वो सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थे, जिनकी आँखें ही काफी थीं दर्शकों के दिलों में दहशत पैदा करने के लिए। उनकी सबसे बड़ी खासियत थी, हर किरदार को अनोखे अंदाज में जीना। जहाँ अक्सर कलाकार स्क्रिप्ट पर निर्भर होते थे, वहीं प्राण साहब असल ज़िंदगी के लोगों से प्रेरणा लेकर पर्दे पर जादू बिखेरते थे। आज हम आपको प्राण साहब के उन 5 अनोखे किरदारों से रूबरू कराते हैं, जिन्हें उन्होंने असल जिंदगी के शख्सियतों से कॉपी किया था।
हिटलर की मूंछों वाला कॉमेडी विलेन: नौरंगी लाल (खानदान, 1965)
यह किस्सा 1965 में आई फिल्म ‘खानदान’ का है, जहां प्राण साहब ने ‘नौरंगी लाल’ का किरदार निभाया था। वो भगवंती (ललिता पवार) के भतीजे थे और अपनी बुआ के घर आकर ऐसी करतूतें करते हैं कि घर का नामो-निशान मिट जाता है।
सबसे मजेदार बात यह है कि उस विलेनियस किरदार में प्राण साहब ने जर्मन तानाशाह हिटलर की झलक पेश की थी। उन्होंने हिटलर वाली पार्टिंग की हुई मूंछें और स्टाइलिश हेयरस्टाइल रखा था, और नाक को मरोड़ने जैसे हाव-भाव डाले थे। यह प्राण साहब की आर्ट का कमाल ही था कि उन्होंने इस खलनायक किरदार में इतना हास्य भर दिया कि लोग डरने की बजाय खूब हंसे।
‘शेख मुजीबुर रहमान’ की झलक: श्याम (जुगनू, 1973)
1973 में आई धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जुगनू’ में प्राण साहब ने ‘श्याम’ का किरदार निभाया, जो धर्मेंद्र के किरदार के पिता थे। इस किरदार का लुक और अंदाज़ बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री और वहां के ‘राष्ट्रपिता’ कहे जाने वाले शेख मुजीबुर रहमान पर आधारित था। प्राण साहब ने न सिर्फ उनकी वेशभूषा बल्कि उनके चेहरे के हाव-भाव और ठहराव को बखूबी उतारा। यह उनके ऑब्जर्वेशन का कमाल था कि वो एक राजनेता के लुक को फिल्म के पिता के किरदार में इस तरह ढाल सके।
अपने डायरेक्टर से चुराई आदत: माइकल डिसूजा (मजबूर, 1974)
अमिताभ बच्चन और परवीन बाबी की फिल्म ‘मजबूर’ में प्राण साहब ने ‘माइकल डिसूजा’ नाम के एक शराबी चोर की भूमिका निभाई थी। यह किरदार दिल का बहुत अच्छा था, बस शराब पीने की एक बुरी आदत थी और अपनी आंखें रगड़ने की एक अनोखी अदा थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आंखें रगड़ने का यह स्टाइल प्राण साहब ने कहीं से सीखा नहीं बल्कि फिल्म के डायरेक्टर रवि टंडन जी से कॉपी किया था? रवि टंडन जी जब भी किसी सीन को फ्रेम करते थे तो अपनी आँखों को इसी तरह रगड़ते थे। प्राण साहब ने अपने डायरेक्टर की ही इस छोटी सी आदत को माइकल डिसूजा की पहचान बना दिया।
‘अब्राहम लिंकन’ वाला मासूम पिता: किशनलाल (अमर अकबर एंथोनी, 1977)
ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘अमर अकबर एंथोनी’ में प्राण साहब ने तीनों हीरोज के पिता ‘किशनलाल’ का किरदार निभाया। यह किरदार हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में गिना जाता है। इस किरदार को प्राण साहब ने तब और भी ज्यादा शानदार बना दिया जब उन्होंने अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन से प्रेरणा ली। उनकी दाढ़ी और उनके कपड़े पहनने का तरीका लिंकन से काफी मिलता था। उन्होंने इस किरदार में एक ऐसे पिता की व्यथा को उकेरा, जो अपने बच्चों से दूर हो जाता है।
‘सैम पित्रोदा’ वाले दादा: निगाहें, 1989
1989 में आई फिल्म ‘निगाहें’ प्राण साहब के करियर के आखिरी दौर की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। यह श्रीदेवी की सुपरहिट फिल्म ‘नगीना’ का सीक्वल था, जिसमें वो श्रीदेवी के दादा के रोल में थे।
इस फिल्म में प्राण साहब ने अपने किरदार का लुक प्रसिद्ध नेता और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट श्री सैम पित्रोदा से तैयार किया था, जो माननीय प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी के सलाहकार थे। उस दौरान उनकी हेयर स्टाइल और चेहरे की बनावट श्री सैम पित्रोदा से काफी मिलती थी।
निष्कर्ष
प्राण साहब ने साबित कर दिया कि एक सच्चा कलाकार कभी पर्दे पर जाकर एक्टिंग नहीं करता, बल्कि अपने आसपास से सीखता है। उनकी शैली का एक ही सिद्धांत था – बारीकी से देखो और बखूबी उतारो। चाहे वो हिटलर की शक्ल हो या लिंकन की दाढ़ी, उन्होंने हर बार एक अलग ही प्रयोग किया। उन्होंने अपने संवाद, हाव-भाव और मूंछों से सीख दी कि अभिनय सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी गुजारने का एक अंदाज है।











