इटारसी। यह सच है, कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम करके लोगों का जीवन बचाने में लगे कोरोना वॉरियर्स पर काम का बेजा दबाव है। तपती दोपहर में लगातार काम, रात में ठीक से नींद नहीं होना और लगातार कई घंटे की मेहनत से गलतियां भी हो रही हैं। काम का यह दबाव अधिकारियों को कम करना होगा, कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी होगी। नहीं तो कुछ दिनों में इस जंग में लगे योद्धाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है।
कर्मचारियों पर काम के दबाव की एक बानगी देखिये। आज ग्राम रामपुर में एक मरीज को होम कोरेन्टाइन किया है। उक्त व्यक्ति को 17-4-2020 से 31-4-2020 के लिए होम कोरेन्टाइन किया है। उसके घर जो पोस्टर चस्पा किया है, उसमें तारीख में 17-4 से 31-4 अंकित कर दी है। जबकि अप्रैल का महीना 31 दिन का नहीं होता है। निश्चित ही यह भूल काम की अधिकता दर्शाती है। गांव में रहने वाला एक व्यक्ति लंबे समय से बीमार है और उसका उपचार डॉ. एनएल हेडा के यहां चलता है। उसे अस्थमा के कारण खांसी लगातार चलती है, उसी का उपचार चल रहा था। जानकारी सामने आने पर उसे होम कोरेन्टाइन करके कहा गया है कि वह अपने घर के ऊपरी तल पर मास्क लगाकर रहे और परिवार के अन्य लोगों से दूरी बनाकर रखे। यदि उसे सर्दी-जुकाम की शिकायत होती है तो तत्काल सिविल अस्पताल में इसकी जानकारी दे। उक्त व्यक्ति की जांच डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय अस्पताल में हो चुकी है, फिलहाल उसे ऐसे कोई लक्षण नहीं हैं।
इतना दबाव की तारीखें भी गलत हो रही हैं


Rohit Nage
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