इटारसी। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव को धोखाधड़ी के एक प्रकरण में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय इटारसी रहेगा और नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा।
नगर पालिका के सहायक राजस्व अधिकारी संजीव श्रीवास्तव को सीएमओ हरिओम वर्मा ने निलंबित कर दिया है। श्रीवास्तव ने न्यास कालोनी में स्थित एक रिक्त भूखंड को आपराधिक षड्यंत्र कर शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना कर फर्जी भूखंड विकसित कर उक्त भूखंड की लीड डीड उप पंजीयक कार्यालय इटारसी में संपादित कर भूखंड क्रेता के साथ भी छल कर 9 लाख रुपए की प्रीमियम राशि प्राप्त कर निकाय के खाते में भी जमा नहीं की है। इस तरह से एआरआई ने अपने कार्यालय के साथ भी धोखा किया है। सीएमओ ने अध्यक्षीय परिषद की बैठक की प्रत्याशा में संजीव श्रीवास्तव को नगर पालिका अधिनियम 1961 मप्र सेवा शर्तें भर्ती नियम 1968 के अनुसार तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।
पूर्व सीएमओ के लिए शासन को पत्र
मुख्य नगर पालिका अधिकारी हरिओम वर्मा ने धोखाधड़ी के इस मामले में अपने अधिकारों को इस्तेमाल करते हुए सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव को तो निलंबित किया ही है, साथ ही पूर्व सीएमओ अक्षत बुंदेला के लिए शासन को पत्र भी लिखा है कि उन्होंने ही ऐसे अनुबंधों और बिक्री के लिए तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला ने ही संजीव श्रीवास्तव को अधिकृत किया था। अब गेंद शासन के पाले में है। शासन को आगामी कार्रवाई करनी होगी।
जांच प्रतिवेदन शासन को
सीएमओ हरिओम वर्मा ने बताया कि संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अब जांच प्रतिवेदन शासन को भेजा जा रहा है। अगली कार्रवाई शासन को करना है। अब शासन निर्णय लेगा और यदि एफआईआर कराना होगा तो सीएमओ नगर पालिका को आदेश आएंगे कि संबंधित के खिलाफ एफआईआर करना है। आदेश आने पर सीएमओ एफआईआर कराएंगे। शासन चाहे तो संबंधित को जांच प्रतिवेदन और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए बर्खास्त भी कर सकता है।
अभी कुर्सी गई है एआरआई की
मुख्य नगर पालिका अधिकारी हरिओम वर्मा का कहना है कि कुर्सी पर रहकर संबंधित अपने पद का दुरुपयोग कर सकता है। उसके पास सारे अधिकार रहेंगे तो वह कागजों में हेरफेर करके नए कागज तैयार करके सारा मामला अपने पक्ष में कर सकता था। यही कारण है कि संबंधित को पीआईसी की प्रत्याशा में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है ताकि वह अपनी कुर्सी से हट जाए और अपने पद का दुरुपयोग कर किसी भी कागज में किसी भी प्रकार की हेरफेर न कर सके।
इनका कहना है…!
जांच प्रतिवेदन शासन को भेजा जा रहा है। अगली कार्रवाई शासन को करना है। अब शासन निर्णय लेगा कि आगे क्या करना है। शासन से आदेश आएंगे तो एफआईआर भी करायी जाएगी। संबंधित को पीआईसी की प्रत्याशा में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
हरिओम वर्मा, सीएमओ
क्या है मामला
प्रियदर्शनी नगर में वात्सल्य अस्पताल के पीछे ए 45 से 50 तक अधिकृत प्लाट हैं। इनका रकबा 800 वर्गफीट हैं। यहां कुछ रिक्त भूमि गार्डन या अन्य कार्य के लिए रोकी गई थी। परंतु नगरपालिका में पदस्थ सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव ने तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला के साथ मिलकर प्लॉट ए 45 के बाद के पश्चिम की और रिक्त भूमि को ए 81 बनाकर बेच दिया। ये प्लॉट 1000 फीट का बनाकर बेचा। लीज डीड के मुताबिक इसका मूल्य 9 लाख रुपए ग्राहक शुभांगी शंकर रसाल से लिया गया। लेकिन ये राशि नगरपालिका के कोष में जमा नहीं हुई। प्लॉट खरीदने वाली शुभांगी रसाल से लिए 9 लाख रुपए आपस में बांट लिए। यहां इस मामले में खास बात ये है कि रजिस्ट्री 20 मार्च 18 को की गई थी और उसी दिन सुबह तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला ने सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव को लीज डीड करने के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी की ओर से अधिकृत किया था।







