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कलाकार, हमेशा जिंदा रहते हैं, सबके दिलों में

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किशोर कुमार, एक ऐसा नाम जो कई बातों के कारण खुद को सबसे अलग रखता है। पाश्र्व गायक, अभिनेता, निर्माता-निर्देशक और ऐसे ही कई किरदार जीवन में निभाने वाले किशोर कुमार 13 अक्टूबर, 1987 को दिल का दौरा पडऩे के बाद हमसे जुदा हो गए. उनकी इच्छा के मुताबिक उन्हें उनकी मातृभूमि खंडवा में ही दफनाया, जहां उनका मन बसता था। वह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी खूबसूरत आवाज मधुर गीतों के रूप में आज भी लोगों के मन-मस्तिष्क में झंकृत हो रही है।
बॉलीवुड में कई ऐसे गायक हैं जिन्होंने गायकी से हटकर एक्टिंग या ऐसे ही किसी दूसरे किरदार में खुद को आजमाने की कोशिश की लेकिन अपने हर किरदार में सफलता किसी के हाथ नहीं लग सकी। गायकी में भी अनेक कलाकारों को अलग-अलग अंदाज में अपनी आवाज देने का $फन केवल किशोर कुमार के पास था। बॉलिवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन, चॉकलेटी हीरो जितेन्द्र और पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को आवाज देने का उनका अंदाज जुदा रहा। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सुरों के असली जादूगर कहलाने वाले गायक, एक्टर, प्रोड्यूसर, म्यूजिक कंपोजर… जैसे कई किरदार निभाकर हर किसी को अपना मुरीद बना लेने वाला एक ही सितारा था, किशोर कुमार। किशोर कुमार ने गीतों को जीवंतता प्रदान की, वे गीतों में कभी मस्ती भरे अंदाज में दिखते तो कभी फिलासफर।
किशोर कुमार मध्यप्रदेश के खंडवा के निवासी और बंगाली परिवार में जन्मे थे। अदायगी से लेकर उनकी गायकी तक का हर कोई कायल रहा था रहा है। खंडवा में 4 अगस्त, 1929 को उनका जन्म हुआ। बचपन का नाम आभास था। पिता कुंजीलाल गांगुली मशहूर वकील थे और बड़े भाई अशोक कुमार बॉलीवुड में एक स्थापित कलाकार थे। फिल्मों में दादामुनि के नाम से मशहूर हुए अशोक कुमार अपने भाई किशोर को गायक नहीं अभिनेता बनाना चाहते थे।
किशोर कुमार ने चार शादियां की थी। उनकी पहली शादी रुमा देवी से हुई थी, लेकिन आपसी अनबन के कारण जल्द ही अलगाव हो गया। उस जमाने की सबसे खूबसूरत अदाकारा मधुबाला किशोर की दीवानी हो गई। फिल्म महलों के ख्वाब से दोनों एक-दूसरे के करीब हुए थे। अपनी पत्नी से अलग हो किशोर कुमार ने मधुबाला के साथ शादी रचाई। मधुबाला संग शादी करने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर करीम अब्दुल रखा। लेकिन यह प्यार भी सिर्फ नौ साल ही चला और मधुबाला ने दुनिया के साथ उन्हें भी अलविदा कह दिया। इसके बाद 1976 में किशोर कुमार ने अभिनेत्री योगिता बाली से शादी की। लेकिन यह शादी भी ज्यादा दिन तक नहीं चल। योगिता ने 1978 में उनसे तलाक लेकर मिथुन चकवर्ती के साथ सात फेरे ले लिए। 1980 में उन्होंने चौथी और आखिरी शादी लीना चंद्रावरकर से की। किशोर कुमार के दो बेटे हैं, अमित कुमार और सुमित कुमार।
कई पुरस्कार मिले
किशोर कुमार हनफनमौला थे। अदाकारी भी उनके खून में थी तो गायकी तो दुनिया कायल थी। इतने प्रतिभा संपन्न कलाकार को कई पुरस्कार मिले। सन् 1980 में फिल्म थोड़ी सी बेवफाई के गीत (हजार राहे जो मुड़ के देखी), 1982 में नमक हलाल (पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी) के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार, 1983 में फिल्म अगर तुम ना होते, 1984 में फिल्म शराबी के मंजिले अपनी जगह है, 1985 की फिल्म सागर के सागर किनारे दिल ये पुकारे के लिए किशोर को फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। किशोर कुमार ने वर्ष 1987 में फैसला किया कि वह फिल्मों से सन्यास लेने के बाद, अपने पैतृक नगर खंडवा लौट जाएंगे। वह कहते थे, दूध जलेबी खाएंगे खंडवा में बस जाएंगे। उनका यह सपना उनके जीते-जी तो पूरा न हो सका, अलबत्ता मौत के बाद वे खंडवा में ही बस गए, हमेशा-हमेशा के लिए। उनकी समाधि पर हर वर्ष उनको चाहने वाले बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर तो जैसे यहां मेला लग जाता है। देशभर के साथ ही खंडवा में अनेक आयोजन होते हैं। हम भी इस हरफनमौला कलाकार के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। किशोर कुमार सबके दिलों में जिंदा हैं, क्योंकि कलाकार मरते नहीं, अपनी कला के जरिए दिलों में जिंदा रहते हैं।
रोहित नागे

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