कवि सम्मेलन से समारोह का समापन
इटारसी। संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन साहित्य अकादमी के तत्वावधान में दो दिवसीय पं. माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति समारोह का समापन हो गया। समारोह के दूसरे दिन साहित्य अकादमी भोपाल के निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाओं के बारे में बताते हुए ‘मैं पहला पत्थर मंदिर का कविता का वाचन किया।
इस दौरान हुए कवि सम्मेलन में दीपाली शर्मा ने माखनलाल चतुर्वेदी की रचित कविता चुप-चुप-चुप-चुप रहती है, दो आंखें कुछ कहती हैं का सस्वर गायन किया। सतीष शर्मा ने कहा चांदनी-चांदनी न रही, रोशनी-रोशनी न रही। है, वे गम की गहराई में, खुद ही खुद बात करते हैं। साथ ही उन्होंने कविता चक्कर लगा-लगाकर अलख जगाता हूं, विश्व को बांधने के लिए प्रेम बढ़ाता हूं, का वाचन किया। ममता बाजपेयी ने माखनलाल चतुर्वेदी का स्मरण कर गीत प्रस्तुत किया। पुरूषोत्तम गौर ने माखनलाल चतुर्वेदी की रचित कविताओं का वाचन किया। साजिद सिरोंजवी ने शायराना अंदाज में कहा रंग में दुनिया के ढल गए होते, अपने दिल भी बदल गये होते, हमने कोशिश ही न की, नहीं तो खोटे सिक्के भी चल गये होते। इसी तारतम्य में आलोक शुक्ल ने भारत माता के इस बेटे को बारंबार प्रणाम है गीत के माध्यम से देशभक्ति का अलख जगाया। संचालन कर रहे अशोक जमनानी ने किसान गीत का गान किया और कविता का पाठ किया। उन्होंने कहा अगम अगाधिराज मत रोको, गंगा अब ससुराल चली, बिटिया अब ससुराल चली। पं. माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति समारोह में हुए साहित्यिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र वितरित कर सम्मानित किया।
काव्य की सरिता बही, पुरस्कार वितरित किए
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