इटारसी। फिर एक मासूम की मौत ने समाज में कई प्रश्न उठा दिये हैं ? क्या कसूर था उस मासूम बच्ची का जिसको लावारिस समझ के न पुलिस प्रशासन न अस्पताल प्रबंधन और न ही उसकी स्वयं की जननी ने उसकी जिम्मेदारी समझी। कहने को तो सरकार की लाडो को लेकर कई योजनाएं हैं ऐसे समय में इन योजनाओं को ताक में रखने से कोई भी विभाग पीछे नहीं रहता।
केसला थानांतर्गत नागपुर रेलवे पर झिरना के पास से मिली बच्ची की मौत होशंगाबाद अस्पताल में दो दिन बाद ही हो गई थी। उसने होशंगाबाद जिला चिकित्सालय में 7 अक्टूबर को अंतिम सांसें ली।
केसला पुलिस मामले की जांच कर ही है कि बच्ची को किसने फैका था। आश्चर्य की बात यह है कि केसला पुलिस को बच्ची की मौत की खबर भी मौत के तीन दिन बाद लगी। इस दौरान केसला पुलिस बच्ची की तलाश में इटारसी, भोपाल और होशंगाबाद के अस्पतालों में भटकती रही।
केसला थाना प्रभारी मोनिका गौर इसे देखने इटारसी के सरकारी अस्पताल पहुंचीं तो पता चला कि उसी दिन बच्ची को होशंगाबाद रैफर कर दिया था। वहां से जानकारी नहीं मिली तो बच्ची को तलाशने पुलिस भोपाल के हमीदिया अस्पताल भी पहुंची, लेकिन यहां भी जानकारी नहीं मिली। अंतत: वापस होशंगाबाद में तलाश पर बता चला कि 7 अक्टूबर को उसकी मृत्यु हो गई थी और होशंगाबाद पुलिस ने मर्ग भी कायम किया है। इस मामले में एसडीओपी अनिल शर्मा ने बताया कि पुलिस ने बच्ची मिली थी तब अज्ञात के खिलाफ धारा 317 का अपराध पंजीबद्ध किया था। अब बच्ची की मौत होने के बाद मामले में धारा 316 और बढ़ा दी जाएगी।
कौन है इस लाडो की मौत का जिम्मेदार ?
For Feedback - info[@]narmadanchal.com








