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टोटल लॉक डाउन : नहीं मान रहे लोग, डंडे की भाषा भी नहीं समझ आ रही

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अब आपके संकल्प और संयम पर है जिंदगी की डोर
इटारसी। मार्च माह के बाद अप्रैल के पहले हफ्ते तक निश्चिंतता से चल रही शहर की जिंदगी में अचानक 7 अप्रैल को खौफ ने जगह बना ली, जब शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एनएल हेडा की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गयी। इस स्थिति से अभी शहर उबरा भी नहीं था कि दूसरे ही दिन 8 अप्रैल को शहर में 5 और कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल गये। इसके बाद तो प्रशासन में मानो हड़कंप मच गया।
प्रशासन ने आनन-फानन में व्यवस्था और रणनीति में परिस्थिति के अनुसार बदलाव लाकर काम करना प्रारंभ कर दिया है। अब प्रशासन की सख्ती बढ़ गयी है। इन सबके अलावा इस महामारी से बचने का जो एकमात्र सबसे मुफीद रास्ता दिखाई दे रहा है, वह है अपने घर में रहना और लोगों से दूरियां बना लेना। यह अब तक का सबसे सुरक्षित और आसान तरीका है। हालात अचानक बदलने से तय हो गया है कि आपकी जिंदगी अब सिर्फ आपके संकल्प और घरों में रहकर संयम से काम लेने पर ही टिक गयी है। हालांकि इतनी सख्ती के बावजूद पुलिस लोगों को घरों के भीतर रखने में मेहनत कर रही है। कई लोग, जिनमें युवाओं की संख्या अधिक है, घर में रहने की जगह बाइक से सड़कें नाप रहे हैं। वे डंडे की बोली भी नहीं समझ रहे हैं।

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आज गुरुवार को नई गरीबी लाइन में पुलिस ने कई युवाओं को डंडे की भाषा समझाने और उठक-बैठक लगाकर समझाने का प्रयास किया। लेकिन, अब कुछ तो मोहल्ले के भीतर ही बाइक दौड़ा रहे, लट्टू चला रहे, क्रिकेट खेल रहे हैं। क्योंकि पुलिस कर्मी तो एक चौराहे पर खड़े होकर ड्यूटी कर रहे हैं। न जाने लोग क्यों अपनी जान के दुश्मन बने हुए हैं। जिन 5 लोगों की टीम बनायी है, वह महज एक बार बाइक से मोहल्ले में घूमकर एक ठिया बनाकर बैठ जाती है। पॉजिटिव रिपोर्ट से हालात बिगडऩे का अंदेशा हो रहा है। क्योंकि अभी एक बड़ी चेन है, जो चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट आने में देरी भी लोगों की चिंता बढ़ा रही है। हर रोज रिपोर्ट का इंतजार होने लगा है। हालांकि कई लोग स्थिति की गंभीरता समझकर घरों के भीतर हो रहे हैं। लेकिन, कुछ व्यवस्थाएं दो दिन के टोटल लॉक डाउन से गड़बड़ा गयी है, इस ओर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। प्रशासनिक सूत्रों से पता चला है कि जीन मोहल्ला निवासी हकीम खान का भतीजा 14 मार्च को झांसी उत्तरप्रदेश से इटारसी आया है।

सब्जी के लाले पड़ने लगे 
अभी टोटल लॉक डाउन को महज दो दिन ही हुए हैं और शहर में सब्जी के लाले पड़ने लगे हैं। दरअसल, प्रशासन ने पहले दूध और मेडिकल दुकानों को छूट के साथ सब्जी मोहल्ले में हाथ ठेलों पर मिलने का कहा था। लेकिन, जैसे ही रिपोर्ट पॉजिटिव आयी, प्रशासन ने सब्जियों पर भी बेन लगा दिया। यह एक तरह से कफ्र्यू वाली स्थिति है, जो कोरोना की चेन तोड़ने के लिए जरूरी है। एसडीएम हरेन्द्र नारायण ने कहा कि सब्जियों के बिना काम चल जाएगा लेकिन कोरोना की चेन तोड़ना बहुत आवश्यक है।

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