जनपद पंचायत केसला की फिर हुई अनदेखी
इटारसी। जनपद पंचायत केसला की अनदेखी करके इस वर्ष फिर से तिलक सिंदूर में महाशिवरात्रि पर लगने वाले मेला लगाने के अधिकार एसडीएम की अध्यक्षता में मेला समिति को सौंप दिया है। इससे केसला जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों की भावना की अनदेखी हो गई है। पिछले माह ही हुई बैठक में जनपद पंचायत से प्रस्ताव पारित करके तिलकसिंदूर मेले का आयोजन स्वयं के हाथ में लेने का निर्णय लिया था। बीते करीब पचास साल से जनपद पंचायत ही महाशिवरात्रि पर मेला लगाती आ रही थी, लेकिन बीते कुछ वर्ष से यह अधिकार जनपद से छीनकर तिलकसिंदूर मेला समिति को सौंप दिए हैं, जिसका हर वर्ष जनपद सदस्य विरोध करते हैं, लेकिन उनके विरोध को हमेशा दरकिनार कर दिया जाता है।
आज सुबह एसडीएम कार्यालय में हुई मीटिंग में जनपद के उन्हीं उपाध्यक्ष की मौजूदगी में आयोजन मेला समिति को करने के लिए सहमति बन गयी। जो लोग मेला जनपद को देने की मांग कर रहे थे, उनमें से ज्यादातर मौजूद नहीं रहे। अलबत्ता जनपद पंचायत केसला के उपाध्यक्ष बैठक में मौजूद थे, लेकिन वे भी जनपद को मेले का आयोजन वापस नहीं दिला सके।
एसडीएम आरएस बघेल की मौजूदगी में उनके ही कार्यालय में हुई तिलक सिंदूर मेला आयोजन के लिए बैठक में ज्यादातर तो अधिकारी ही उपस्थित थे, कुछ मेला समिति के सदस्य थे, लेकिन जनपद की ओर से जनप्रतिनिधि के नाम पर केवल उपाध्यक्ष ही पहुंचे थे, जबकि अधिकारियों में सीईओ एसएस पठारिया, टीआई रामस्नेह चौहान, ट्रैफिक इंचार्ज व्हीएस द्विवेदी, नपा के सब इंजीनियर आदित्य पांडेय, आरआई भरतलाल सिंघावने, आदिवासियों की समिति के अध्यक्ष बलदेव तेकाम शामिल हुए।

जनपद ने किया था विरोध
विगत 12 जनवरी को केसला जनपद पंचायत ने जनपद पंचायत से मेला छीनने का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें मांग की थी कि मेला संचालन का अधिकार जनपद पंचायत को ही मिलना चाहिए। सभी से सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। खास बात तो यह है कि जनपद पंचायत अध्यक्ष गनपत उईके और उपाध्यक्ष सुनील चौधरी ने ही यह प्रस्ताव रखा। अब अध्यक्ष असहाय होकर कह रहे हैं कि क्या कर सकते हैं? जबकि उपाध्यक्ष मीटिंग में जनपद की भावना का दमदारी से नहीं रख सके। बता दें कि पिछले कुछ वर्षों से मेला संचालन का हक जनपद पंचायत से छीनकर तिलकसिंदूर समिति को दिया जा रहा है, जिससे जनपद पंचायत के प्रतिनिधियों में खासी नाराजी है। इस बार फिर एसडीएम कार्यालय में हुई बैठक में मेला संचालन मेला समिति को मिल गया है।
पंचायतराज एक्ट में क्या है
दरअसल, पंचायतीराज एक्ट में प्रावधान है कि मेले का संचालन जनपद पंचायत क्षेत्र में जनपद पंचायत, नपा क्षेत्र में नपा ही करेगी। इसी को सामने रखकर जनपद पंचायत ने मेला संचालन वापस पाने के प्रयास किए हैं। दो वर्ष पूर्व तक जनपद ही मेला आयोजित करती थी। तिलकसिंदूर मेला प्रबंधन संचालन करती है जिससे जनपद पंचायत को राजस्व की हानि होती है। पंचायत राज अधिनियम के तहत मेला का नियंत्रण एवं निरीक्षण का सारा काम जनपद पंचायत को शासन से मिला है। लेकिन केसला आदिवासी जनपद पंचायत क्षेत्र के तिलक सिंदूर में महाशिवरात्रि पर लगने वाले मेला के प्रबंधन, नियंत्रण की जिम्मेदारी यहां की जनपद पंचायत से छीनकर एक मेला समिति बनाकर उसको दे दी है। जनपद सदस्यों की मांग को भी हर बार दरकिनार करते हुए मेला समिति को सारा जिम्मा सौंप दिया जाता है।
जिले में अन्य स्थानों की स्थिति
जनपद पंचायतों में जनपद और शहर में नगरपालिका मेला का आयोजन करती है। होशंगाबाद में रामजी बाबा मेला का आयोजन नगर पालिका परिषद होशंगाबाद करती है। भीलटदेव मेला का आयोजन जनपद पंचायत सिवनी मालवा करती है और तवा और नर्मदा नदी के संगम स्थल बांद्राभान में लगने वाले मेले का आयोजन होशंगाबाद जनपद करती है। केवल केसला जनपद से ही उसका यह अधिकार छीन लिया गया है।
इनका कहना है…!
मेरी जानकारी में नहीं है कि जनपद पंचायत मेले का आयोजन करती थी। इस वर्ष तो पुरानी व्यवस्था ही रहेगी। देखेंगे कि जनपद ने कब आयोजन किया, इसके बाद यदि नियम में होगा तो अगले वर्ष से उसी के अनुसार व्यवस्था की जाएगी।
आरएस बघेल, एसडीएम








