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दो साल में नहीं हुआ पूर्ण विस्थापन

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इटारसी। बोरी अभयारण्य से विस्थापित होकर आए ग्राम सांकई, भाड़भूड़, रतिबंदर, पोडार और जाम के सैंकड़ों आदिवासी परिवारों का दो वर्ष में भी उचित व्यवस्थापन नहीं सका है, जबकि इसकी पूर्ण जिम्मे,दारी वन विभाग ने ली थी। उन्होंने अपनी जि मेदारी के प्रति घोर लापरवाही बरती है जिसका खामियाजा ग्रामवासियों को भुगतना पड़ रहा है। यह आरोप आज यहां तहसीलदा कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने तहसीदार को दिए ज्ञापन में लगाए हैं। उनका कहना है कि पुनर्वास नीति के तहत जो व्यवस्थापन होना चाहिए था, वह नहीं हो पा रहा है जिससे उनकी आजीविका पर संकट पैदा हो गया है। इन आदिवासियों की मांग है कि जो लोग जमीन से वंचित रहे गए उन्हें जमीन दी जाए, भूमि का समतलीकरण करके खेती लायक बनाएं, योजना के तहत खेत में ट्यूबवेल, तालाब बनाए, जहां ट्यूबवेल खुदे हैं वहां पाइप डालें, खेत में मेढ़ बंधान कराएं, जिन ग्रामीणों से वन विभाग द्वारा मजदूरी करायी गई है उसका भुगतान तत्काल कराया जाए, गांव में तत्काल रोजगार खोला जाए ताकि ग्राम के लोगों को काम मिल सके और समय पर भुगतान हो, गांव में अधूरे पड़े भवनों का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूर्ण कराया जाए, पांच वर्ष तक बिजली बिल जमा नहीं करने के वायदे को पूर्ण करें, क्योंकि विभाग बड़े-बड़े बिल भेज रहा है, इसका भुगतान वन विभाग से कराके सभी समस्या जल्द हल हो।
इनका कहना है…!
बोरी से विस्थापित किए गए ग्रामीणों ने ज्ञापन तो आज यहां आकर दिया है जबकि एसडीएम ने पहले ही उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक बैठक का आयोजन किया है जो 18 फरवरी को होगी। इसमें सभी संबंधित विभागों को अधिकारियों को बुलाया गया है। बैठक में ट्यूबवेल खान, आधार कार्ड और राशन पर्ची जैसी समस्या पर विचार करके हल निकाला जाएगा।
एनपी शर्मा, नायब तहसीलदार

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