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धनतेरस : बाजार को जो आशंका थी, वैसा कुछ नहीं हुआ

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इटारसी। धनतेरस पर बाजार को जो आशंकाएं सता रही थीं, वैसा कुछ नहीं हुआ। सराफा रोशन रहा तो आटोमोबाइल संतुष्ट। दिन में मायूस बर्तन बाजार शाम को खुश हो गया। हालांकि कपड़ा बाजार को खासी मायूसी उठानी पड़ी। इलेक्ट्रानिक्स में ग्राहकों की ज्यादा पसंद मोबाइल, टेलीविजन और फ्रिज रहे। धनतेरस के बाजार में पिछले साल जैसी रौनक तो नहीं थी। लेकिन इसे सामान्य कहा जा सकता है। दुकानदारों को उम्मीद है कि दीपावली के दिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए बाजार पहुंचेंगे।
एक माह पूर्व दीवाली का पर्व आने से ग्राहकी में कमी सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है क्योंकि फसल नहीं आने से गांवों के खरीदार नहीं आए हैं। ऐसे में दीवाली का बाजार केवल शहरी खरीदारी पर ही आधारित रह गए हैं।

सराफा ठीक रहा, कपड़ा मायूस
बाजार को धनतेरस से दीपावाली की खरीदारी की उम्मीद होती है। धनतेरस ने सराफा बाजार को नाउम्मीद नहीं किया। सराफा कारोबारियों के मुताबिक फसल नहीं आने, नोटबंदी और जीएसटी के कारण इस बार बाजार बुरी तरह से प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन बाजार ने निराश नहीं किया। अलबत्ता बहुत अधिक ग्राहकी नहीं हुई तो बहुत कम भी नहीं रही। अनुमान के मुताबिक सराफा बाजार में धनतेरस पर करीब दो करोड़ का कारोबार हुआ है। आटोमोबाइल कारोबारियों ने भी इसे संतोषजनक बताया और अगले माह शादियों का सीजन से उठाव आने की उम्मीद की। यहां भी शहरी खरीदार ही आए। धनतेरस पर बर्तन बाजार में शाम के बाद जमकर ग्राहकी हुई। जीएसटी या नोटबंदी से यहां करीब बीस फीसदी असर पड़ा है। इलेक्ट्रानिक्स का कारोबार भी ठीकठाक रहा । मोबाइल, टीवी और फ्रिज के खरीदार बाजार में ज्यादा पहुंचे हैं। इसमें एलईडी और 15 से 20 हजार के फ्रिज की डिमांड अधिक रही। पटाखा बाजार शुरुआत दौर में है तो कपड़ा बाजार अभी मायूस ही रहा है। बाजार में ज्यादातर कपड़े की दुकानों पर त्योहार के अनुसार खरीदी करने ग्राहक नहीं पहुंचे हैं।

ये रहा कारोबारियों का मत
बर्तन विक्रेता मनीष जैसवाल के मुताबिक इस साल धनतरेस पर बिक्री में कोई खास अंतर नहीं आया है। दिन में ग्राहकी नहीं के बराबर थी, शाम के बाद लोग घर से निकले और पूजा की थाली, पीतल की मूर्तियां, स्टील के बर्तनों में सबसे ज्यादा चम्मच एवं गिलास की मांग रही है। बड़ी संख्या में ग्राहकों ने पूजा की थाली भी खरीदी हैं। इसी प्रकार पीतल के बर्तनों में पूजा में प्रयोग होने वाली थाली, लोटा, घंटी जैसी चीजों की मांग है। तांबे के बर्तनों में भी ज्यादातर इसी तरह की चीजों की खरीद फरोख्त हो रही है। सराफा कारोबार बेनीशंकर शर्मा और संजय गोठी के अनुसार बाजार में बहुत उछाल तो नहीं रहा, लेकिन इसे संतोषजनक माना जा सकता है। दीवाली अक्टूबर में होने और फसल नहीं आने का असर बाजार में साफ देख सकते हैं। हालांकि जितना बाजार खराब होने की आशंकाएं थीं, वैसा भी नहीं रहा है। इसे सामान्य कहा जा सकता है। धनतेरस पर लोगों ने सोने के सिक्कों की जगह जेवर खरीदने में रुचि दिखाई है। आटोमोबाइल विक्रेता मो. अथर खान और आलोक शर्मा के मुताबिक त्योहार के मुताबिक खरीदी नहीं रही लेकिन, इसे खराब नहीं कहा जा सकता है।

आ सकती है बाजार में तेजी
दीपावली के दो दिन पूर्व सबसे ज्यादा खरीदारी धनतेरस के दिन ही होती है। लेकिन, इस वर्ष अपेक्षाकृत कम ग्राहकी होने से अब व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि बुधवार और गुरुवार को खरीद फरोख्त में तेजी आ सकती है। जिन लोगों ने बीते दो दिनों में कोई खरीदारी नहीं की है, वह अब बाजार आएंगे। हालांकि वह कितनी खरीदारी करेंगे, यह उनका बजट तय करेगा। अलबत्ता त्योहार की ग्राहकी में छोटे कारोबारी खुश हैं। दीये-बाती खील-बताशे, सजावट की सामग्री, पोस्टर, इलेक्ट्रिकल्स में सीरिज, मिठाई आदि का कारोबार ठीक गति से चल रहा है। मिठाई में दूध की मिठाई, देसी दीये, विद्युत बल्व की देसी सीरिज की अच्छी मांग है।

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