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परेशानी : विपणन संघ का दावा स्टॉक में है पर्याप्त यूरिया

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इटारसी। किसान यूरिया के लिए परेशान हैं, विपणन संघ पर्याप्त यूरिया होने का दावा कर रहा है। यदि यूरिया पर्याप्त है तो किसान असंतुष्ट क्यों? इस सवाल का जवाब है कि किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया मांग रहा है। किसान कह रहे हैं कि यूरिया पर्याप्त नहीं मिल रही, चक्कर काटने पड़ रहे हैं, अभी फसल को जरूरत है। यूरिया वितरण करने वाली एजेंसी का दावा है कि यूरिया की कहीं कमी नहीं है। इन सब दावों के बीच किसानों का कहना है कि सरकार तो बदल गयी लेकिन, किसानों की स्थिति नहीं बदली। किसान पहले भी परेशान था, अब भी परेशान है।
कृषि उपज मंडी परिसर के सामने विपणन संघ की गोदाम से हर रोज यूरिया वितरण हो रहा है। गोदाम प्रभारी देवेन्द्र विश्वकर्मा का दावा है कि यूरिया पर्याप्त संख्या में है। अभी गोदाम में चार सौ टन यूरिया रखा है और पांच सौ टन यूरिया आने वाला है। यहां गोदाम से भी किसानों को यूरिया का वितरण किया जा रहा है तो सरकारी समितियों को भी पर्याप्त यूरिया दिया जा रहा है। उनके यहां से इटारसी तहसील के किसानों को यूरिया मिल रहा है और सोसायटी को भी यहीं से दिया जा रहा है।

9 सोसायटी निरंतर उठा रही
विपणन संघ की खेड़ा स्थित गोदाम से इटारसी तहसील के किसानों को सीधे यूरिया का वितरण भी हो रहा है, वहीं तहसील की 9 सहकारी समितियों को भी यहीं से यूरिया दिया जा रहा है। यहां से यूरिया के अलावा डीएपी भी वितरण हो रहा है। एक जानकारी के अनुसार वैसे तो यहां 17 सहकारी समितियां हैं। लेकिन, जो रेग्युलर यूरिया का उठाव कर रही हैं, वे केवल 9 ही हैं। जो समितियां निरंतर यूरिया उठा रही हैं, उनमें सोनतलाई, इटारसी, सनखेड़ा, केसला, घाटली, व्याबरा, रामपुर और कालाआखर हैं।

इस मान से मिल रही खाद
रबी सीजन के लिए किसानों को यूरिया की मांग कितनी हो, लेकिन विपणन संघ से एक एकड़ भूमि के लिए दो बोरी प्रदान की जा रही है। विपणन संघ के जिम्मेदारों का कहना है कि किसानों की मांग तो ज्यादा होती है। कोई तीन तो कोई चार बोरी भी मांग रहा है। लेकिन, जितनी जरूरत होगी, उस मान से ही खेतों में यूरिया डालना बेहतर होगा। किसान जरूरत से ज्यादा मांगता है और नहीं देने पर असंतोष जताता है। गोदाम से किसानों को 266 रुपए 50 पैसे प्रति बोरी के मान से यूरिया दी जा रही है।

खुले बाजार में नहीं मिल रही
इस वर्ष से राज्य सरकार ने कालाबाजारी की आशंका के चलते खुले बाजार में यूरिया विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया है। यानी खाद-बीज की दुकानों से अब यूरिया नहीं मिलेगा। केवल विपणन संघ के गोदाम से और सहकारी सोसायटियों से ही किसानों को यूरिया प्रदान किया जाएगा। हालांकि कुछ किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार ने इस व्यवस्था के बाद किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। जब सोसायटी से यूरिया नहीं मिलता था तो परेशान किसान खुले बाजार से पूर्ति कर लेता था।

इनका कहना है…!
हमारे पास पर्याप्त मात्रा में यूरिया का स्टॉक है। किसानों को मांग पर दो बोरी प्रति एकड़ के मान से यूरिया दे रहे हैं। फिलहाल चार सौ टन स्टॉक में है, पांच सौ टन और आने वाली है। यूरिया की कहीं कोई कमी नहीं है। खेड़ा गोदाम और सहकारी समितियों से भी यूरिया वितरण किया जा रहा है।
देवेन्द्र विश्वकर्मा, गोदाम प्रभारी

किसानों का कहना है…!
यूरिया के लिए किसान परेशान हो रहा है। रैक तो लग रही है, लेकिन यहां विपणन संघ की गोदाम में नहीं भेजकर बाहर भेजी जा रही है। इटारसी के किसान तो परेशान हैं। यहां ट्रक लोड करके बाहर भेजे जा रहे हैं। हमारा कहना है कि यदि पर्याप्त यूरिया है तो फिर किसान क्यों परेशान हैं? किसानों को जितनी मात्रा में यूरिया की जरूरत है, उस मान से तो मिल ही नहीं रही है, ऐसे में हम क्या करें?
रामनाथ चौरे, किसान
सरकार तो हमने बदल दी। लेकिन, स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। यदि विपणन संघ कहता है कि पर्याप्त यूरिया है तो फिर देते क्यों नहीं? किसानों को सोसायटी के चक्कर क्यों कटवाये जा रहे हैं। सोसायटियों को भी पर्याप्त यूरिया नहीं दिया जा रहा है, किसान चक्कर काटकर परेशान हैं। पहले बाजार में मिल जाती थी, अब वहां भी नहीं देकर केवल सोसायटी से दे रहे हैं, वह भी पर्याप्त नहीं है। यदि व्यापारी कालाबाजारी करते हैं, तो उन्हें पकड़ो न, ऐसे में किसान तो परेशान होगा।
हंसराज गालर, किसान

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