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चार बड़ी चोरियों का हुआ खुलासा

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पांच लाख नगदी और सामान सहित दो गिरफ्तार
इटारसी। शहर की तिरुपति कालोनी, महर्षि नगर, न्यास कालोनी और बांस डिपो सूरजगंज में हुई नकबजनी की वारदातों का पुलिस ने आज दोपहर खुलासा कर दिया है। मामले में सतविंदर पिता जगतार सिंह कालकट उम्र 20 साल और प्रकाश पिता सतीश पटेल उम्र 21 साल को गिरफ्तार किया है।
बताया जाता है कि दोनों आरोपियों ने उनके महंगे शौक के चलते वारदातों को अंजाम दिया था। सतविंदर नकबजनी करता था और प्रकाश घर के बाहर रहकर सतविंदर को मोबाइल पर बाहर के हालात से चौकन्ना रखता था। सूत्र बताते हैं कि सतविंदर को प्रतापपुरा भारत माता चौराहे के पास से लोगों ने चोरी करते समय पकड़ा था। इसके बाद पूछताछ में पुलिस को और भी चोरियों का पता चला है। पकड़े गए युवकों से 4 लाख 90 हजार, चांदी की पायल, 2 मोबाइल फ़ोन आदि सामान बरामद हुआ है।

दो भाजपा नेताओं के यहां हुई थी चोरी
आज दोपहर एसडीओपी अनिल शर्मा और टीआई विक्रम रजक ने बताया कि चार प्रमुख चोरियों का खुलासा हो गया है। इसमें 1 फरवरी को न्यास कालोनी के मोतीलाल पिता मोहन प्रसाद पांडे के यहां, 6 फरवरी को महर्षि नगर में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दीपक अठौत्रा के यहां, 27 फरवरी को बांस डिपो सूरजगंज में मोनू पिता अशोक तुमराम के यहां और 4 मार्च को तिरुपति कालोनी निवासी भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष सुशील पिता बाबूलाल चौधरी के यहां हुई चोरी शामिल हैं।

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ये माल हुआ है जब्त
पुलिस ने न्यास कालोनी में हुई चोरी के माल से 3437 रुपए नगद और दस्तावेज, महर्षिनगर में हुई वारदात में से 7 हजार रुपए नगद एवं दो मोबाइल फोन, बांस डिपो वाली चोरी से 35 हजार नगद, एक जोड़ चांदी की पायल और तिरुपति कालोनी की चोरी में से 49 हजार रुपए नगद एवं जेवर बरामद कर लिए हैं। इस तरह से पुलिस ने दोनों आरोपियों से कुल 5 लाख 9 हजार रुपए का कुल मशरूका बरामद करने में सफलता हासिल की है। मुखबिर की सूचना पर यह सफलता हासिल हुई है।

पहली बार आए पुलिस के हाथ
बताया जाता है कि आरोपियों में से सतविन्दर पहले भी कुछ छिटपुट वारदात करता रहा है, लेकिन अभी तक यह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा था। इसका कोई पुराना रिकार्ड भी पुलिस के पास नहीं था। लेकिन, पकड़े जाने के बाद उसकी पूर्व में की गई वारदात का पता चला कि उसने एक बार अपने ही मोहल्ले हरसंगत कालोनी में एक संगत से 20 हजार चुराए थे, लेकिन सामाजिक मामला होने से समझौता हो गया था। एक बार एक पंखा चुराया था, जब इसके पिता ने माफी मांगकर मामला शांत कराया था।

ऐसे करते थे वारदात
दोनों आरोपियों को महंगे शौक थे। इसकी पूर्ति करने के लिए ये लोग साथ मिलकर नकबजनी करते थे। वारदात के वक्त सतविन्दर एक लोहे की रॉड से सूने मकानों का ताला तोड़कर नकबजनी की वारदात को अंजाम देता था, दूसरा आरोपी प्रकाश घर के सामने रहकर सतविन्दर को मोबाइल फोन से बाहर के हालात की जानकारी देता रहता था। इस तरह सतविन्दर मकान के भीतर चौकन्ना रहकर वारदात को अंजाम दिया करता था। वारदात के समय दोनों हेडफोन का इस्तेमाल कर एकदूसरे से संपर्क में रहते थे।

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