कृषि विज्ञान मेले का समारोह पूर्वक हुआ समापन
होशंगाबाद। ग्रामोदय से भारत उदय अभियान के तहत पवारखेडा में तीन दिवसीय कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया गया। इसका समापन संयुक्त संचालक कृषि बी.एल. बिलैया ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शासन खेती को आधुनिक बनाने के लिये किसानों को अनेक सुविधायें दे रहा है। इनका लाभ उठाएं। किसान उचित प्रबंधन से खेती की लागत घटाये तथा फसलों का उत्पादन बढाये तभी उनकी आय दोगुनी होगी। जैविक खेती से भी लागत में कमी आयेगी। खेती के साथ किसान उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन को भी अपनाये। इस वर्ष 2 जुलाई को नर्मदा नदी के तटो सहित पूरे जिले में लाखों पौधे रोपित किये जायेंगे। सभी किसान भाई अभी से तैयारी कर कम से कम 10 फलदार पौधे रोपित करें।
संयुक्त संचालक ने कहा कि किसान उन्नत बीज का उपयोग करें। आधारभूत बीज मिलने पर प्राप्त फसल से ग्रेडिंग कर प्रमाणित बीज तैयार करें। बीज समितियाँ बना कर भी बीज तैयार करें। किसान अपने खेत की माटी के नमूने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से लैब को उपलब्ध करये। माटी की जांच के बाद उसका हेल्थकार्ड दिया जायेगा। उसके अनुसार फसल तथा खाद का उपयोग करें। उन्होने कहा कि जिन क्षेत्रों में बिजली नहीं है वहां सोलर सिचाई पंप का उपयोग किसा करें। सोलर पंप में 90 प्रतिशत छूट दी जा रही है। इसके लिये आनलाईन आवेदन 15 मई तक किया जा सकता है। खाद तथा बीज में किसान को अनुदान उसके बैक खाते में दिया जायेगा।
समापन समारोह में उपसंचालक कृषि जे.एस.गुर्जर ने कहा कि किसान नरवाई को नष्ट करने के लिये खेतो की गहरी जुताई करायें। इससे मिट्टी की उर्वरता बढेगी गहरी जुताई के लिये अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा लघु सीमांत किसानों को 4 हजार रूपये अनुदान दिया जा रहा है। गहरी जुताई से हानिकारक इल्ली तथा अच्छी किस्म के बीज का उपयोग करें। इसकी बोनी से रिजफेरो अथवा रिजवंड विधि करें। लगातार तीन फसलें लेने से भूमि कठोर हो रही है। इसकी उच्च उर्वरता बनाये रखने के लिये फसल में अंतर रखे। खेत में सन-ढेचा लगाकर उसमें हरी खाद तैयार करें। नरवाई जलाने से खेतो की उत्पादक क्षमता घटती है।
उन्होंने बताया कि ग्रामोदय अभियान के दौरान 14 कृषि क्रांति रथो ने 380 ग्राम पंचायतो का भ्रमण किया। इस अवधि में 20608 किसानों ने इससे लाभ उठाया। समारोह में 150 किसानों को सोयाबीन बीज के मिनी किट वितरित किये गये। समारोह में निजी कम्पनी द्वारा 14 उन्नत किसानों को सम्मानित करते हुये नीम के पौधे वितरित किये गये। समारोह में कृषि प्रशिक्षण केन्द्र पवारखेडा के हाल ही में सेवानिवृत्त हुये प्राचार्य श्री वी.आर.लोखंडे को शाल – श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। इसके पूर्व कृषि वैज्ञानिक डॉ. जायसवाल ने किसानों को फसल के हानिकार कीटों की पहचान तथा उन्हें नष्ट करने की जैविक विधियों की जानकारी दी। डॉ. भाष्कर ने खरीफ फसल की तैयारियों तथा श्री कबीर पंथी ने मछली पालन के संबंध में जानकारी दी। समापन समारोह में रेशम उत्पादन, पशुओं के उपचार, सौर ऊर्जा उपकरणों के उपयोग की भी जानकारी दी गयी। समारोह का समापन परियोजना संचालक डॉ श्री एम.एल.दिलवारिया द्वारा आभार प्रदर्शन से हुआ।
फसल की लागत घटाकर उत्पादकता बढाये – संयुक्त संचालक
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