इटारसी। ठंडी पुलिया से बारह बंगला जाने वाले मार्ग पर स्थित रेल भूमि से रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा हटाया अतिक्रमण विवाद में आ गया है। जिन लोगों के कच्चे टपरे, तार की फैंसिंग, कच्चे चबूतरे या सामने बनायी गई पेड़-पौधों की क्यारियां हटा दी गई हैं, उन्होंने विभागीय अधिकारियों पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए मिलीभगत का आरोप लगाया है। इस रोड पर रह रहे लोगों का कहना है कि जिनका अतिक्रमण हटाना था, उनके यहां अधिकारियों ने बैठकर चाय पीयी और वापस चले गये। अतिक्रमण हटाने के लिए आईओडब्ल्यू चीफ एमके अग्रवाल और एडीईएन मतीन खान दल-बल के साथ पहुंचे थे।
रेलवे के आईओडब्ल्यू विभाग ने शुक्रवार को ठंडी पुलिया से बारह बंगला मार्ग पर रहने वालों के घरों के सामने बने कच्चे निर्माण, बाग-बगीचे, तार की फेंसिंग आदि तोड़ दी। अधिकारियों का कहना है कि जब भोपाल या जबलपुर से बड़े अफसर आते हैं तो यह सब देखकर जाते हैं। उच्च स्तर ये आये आदेश के बाद विभाग ने यह कदम उठाया है। हालांकि जो लोग रेलवे की इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कहना है कि पिछले तीस वर्षों से इसी तरह का भेदभाव किया जा रहा है। जिन्होंने पक्का निर्माण कर लिया है, उनको उच्च स्तर से कोर्ट की कार्रवाई के नाम पर छोड़कर हमें भी पक्कर निर्माण करने की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
रेलवे ने हटाया था अतिक्रमण
रेलवे के इंजीनियर विभाग की टीम ने रेलवे की सीमा से शुक्रवार को अतिक्रमण हटाया था। लेकिन, लोगों का कहना है कि मौजूद अफसरों ने इसमें मुंह देखकर कार्यवाही की है। हालांकि विभाग के अधिकारियों ने इसे पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से नियम के अनुसार ही किया गया है। पहले लोगों को नोटिस दिया गया था। जब कोई रिस्पांस नहीं मिला तो आरपीएफ की टीम ले जाकर हमने अतिक्रमण हटाया है। जहां तक भेदभाव की बात है तो यह पूरी तरह से गलत है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है। पक्के अतिक्रमण को हम इस तरह से नहीं हटा सकते हैं। उसके लिए भोपाल में बाकायदा प्रक्रिया होती है, वहां कोर्ट से नोटिस आते हैं, इसके बाद ही हटाया जा सकता है।
अफसर ने देखा तो दिये आदेश
रेलवे के अफसरों का कहना है कि इस मार्ग पर अतिक्रमण थे और यहां से गुजर रहे भोपाल के एक अफसर की नजर इस अतिक्रमण पर पड़ी थी। इसके बाद उच्च स्तर से आदेश आने पर नोटिस दिये थे। पिछले डेढ़ वर्ष से इन लोगों को स्वयं यह अतिक्रमण हटाने के नोटिस दिये जा रहे हैं। लेकिन, जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो फिर अंतत: रेलवे को स्वयं आगे आकर यह अतिक्रमण हटाना पड़ा है। जिन लोगों के पक्के भवन बने हैं, उनका भी जो कच्चा अतिक्रमण था, उसे हटाया गया है। पक्का अतिक्रमण तोडऩे की एक प्रक्रिया होती है, जो विभागीय स्तर पर चल रही है। भोपाल स्तर पर जब प्रक्रिया पूर्ण होकर हमें आदेश मिल जाएंगे तो हम किसी भी तरह का पक्का अतिक्रमण होगा, बिना किसी रोकटोक के हटा देंगे।

ये है, अफसरों पर आरोप
ठंडी पुलिया से बारह बंगला मार्ग पर रहने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारी विनोद सिंह हाडा ने रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की इस कार्रवाई को पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और मुंहदेखी कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि कोई भी रेलवे का अधिकारी आकर स्वयं देख सकता है कि यहां भेदभाव किया गया है। यहां गहरे तक जमीन खोद दी गई है और आना-जाना मुश्किल कर दिया है। जो अनाधिकृत नहीं था उसे भी खोद दिया। जिनके दो-दो कमरे बनाकर पक्का अतिक्रमण कर लिया है, उनके यहां अतिक्रमण तोडऩे की जगह अधिकारी चाय पी रहे थे। अधिकारियों ने सामने लगे पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचा दिया है। हमने विरोध किया तो कोर्ट की बात कहने लगे। लेकिन, हम तो पिछले तीस वर्षों से यह देख रहे हैं। तीस वर्ष में कोर्ट से इनको तोडऩे के आर्डर तक नहीं करा सके, ये अधिकारी। श्री हाडा का सीधा आरोप है, कि मामले में अफसरों और पक्का अतिक्रमण करने वालों के बीच कुछ लेनदेन हुआ है, यही कारण है कि उनको छोड़ दिया गया है।
इनका कहना है…!
अतिक्रमण हटाने में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया गया है। जहां तक पक्के अतिक्रमण हटाने की बात है तो, उसकी एक पूरी प्रक्रिया भोपाल स्तर पर होती है। उसके लिए हमने प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। जो लोग आरोप लग रहे हैं, वह बेबुनियाद हैं।
मतीन खान, एडीईएन
नयायार्ड रोड पर भी चलेगी जेसीबी
रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केवल इस ठंडी पुलिया से बारह बंगला रोड पर ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। आगामी दिनों में राज टाकीज के पास से ग्वालबाबा तक के क्षेत्र में भी जितने अतिक्रमण हैं, वे हटाये जाएंगे। दरअसल, यह बड़ा अभियान होगा, अत: इसमें अधिक सुरक्षा बल लगेगा। इसके लिए उच्च स्तर से हम सुरक्षा बल मांगा है। जैसे ही बल मिलेगा, नयायार्ड रोड का अतिक्रमण भी हटाना प्रारंभ किया जाएगा। इस मार्ग पर वैसे तो ज्यादातर कच्चे अतिक्रमण ही हैं, लेकिन, जो एक-दो पक्के अतिक्रमण हैं, उनके लिए भी भोपाल स्तर से प्रक्रिया कराने के बाद वहां के पक्के अतिक्रमण भी हटाए जाएंगे। इंजीनिरिंग विभाग के अफसर कार्रवाई को पूरी तरह से भेदभाव रहित बता रहे हैं।







