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समुदाय के सहयोग से कुपोषण को मिटायेंगे : आयुक्त श्रीमती सिंह

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कुपोषण नियंत्रण का पायलेट प्रोजेक्ट लागू होगा केसला मे
होशंगाबाद। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अतिकम वजन के बच्चो का पोषण स्तर बढाने के लिये समुदाय आधारित कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसका पायलेट प्रोजेक्ट होशंगाबाद जिले के अनुसूचित जनजातिबहुल केसला विकास खण्ड मे लागू किया जा रहा है। इससे संबंधित बैठक कलेक्ट्रेट के रेवा सभाकक्ष मे आयोजित की गई। बैठक मे आयुक्त महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती पुष्पलता सिंह ने कहा कि पोषण पुर्नवास केन्द्रो के माध्यम से सभी अतिकम तथा कम वजन के बच्चो की स्वास्थ्य रक्षा संभव नही है। इसके लिये समुदाय आधारित कुपोषण नियंत्रण कार्यक्रम बनाया गया है। इसे केसला विकास खण्ड मे लागू किया जा रहा है। इसके सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश मे लागू किया जाएगा। समुदाय के सहयोग से अतिकम वजन तथा कम वजन के बच्चो के पोषण स्तर मे सुधार करेगे। इसके लिये बच्चे के परिवार के सदस्यो विशेष कर उसकी मां के व्यवहार मे परिवर्तन पर विशेष जोर दिया जाएगा।
उन्होने कहा कि होशंगाबाद मे महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगन बाडी केन्द्रो मे सुधार के लिये समुदाय आधारित अटल बाल पालक योजना लागू की गई है। इस सराहनीय और सफल प्रयास को पूरे प्रदेश मे लागू किया जा रहा है। इसे ध्यान मे रखते हुए ही अतिकम वजन के बच्चो के पोषण के पायलेट प्रोजेक्ट के लिये केसला का चयन किया गया है। अतिकम वजन के बच्चो का घर-घर जाकर चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद उन्हे अतिरिक्त पोषण आहार तथा उपचार की सुविधा 70 दिनो तक दी जाएगी। इस अवधि मे बच्चे को सामान्य वजन का लाने के लिये प्रयास किये जाएगे। इसका प्रशिक्षण जिला तथा विकास खण्ड स्तर पर दिया जाएगा। शुरू मे केवल 300 बच्चो को इसमे शामिल किया जाएगा। इसे सफल बनाने मे स्वास्थ्य विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। अभियान मे किसी तरह की लापरवाही सहन नही की जाएगी।
बैठक मे कलेक्टर श्री अविनाश लवानिया ने कहा कि केसला मे लागू हो रहे पायलेट प्रोजेक्ट के द्वारा अतिकम वजन के शतप्रतिशत बच्चो का कुपोषण दूर किया जाएगा। इसे सफल बनाने मे कोई कोर कसर नही रहेगी। जन सहयोग तथा समुदाय आधारित इस कार्यक्रम को सब मिलकर सफल बनायेगे। बैठक मे सुश्री दीपिका ने पायलेट प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि अतिकम वजन तथा कम वजन के 85 प्रतिशत बच्चो की स्वास्थ्य रक्षा उनके घर पर ही संभव है। केवल 15 प्रतिशत बच्चो को ही पोषण पुर्नवास भेजने की आवश्यकता होती है। घर-घर जाकर अतिकम तथा कम वजन वाले बच्चो का चिन्हाकन किया जाएगा उन्हे विशेष रूप से तैयार अतिरिक्त पोषण आहार के 3 पैकेट प्रतिदिन खिलाए जाएगे। बच्चे को लगातार 70 दिन तक अतिरिक्त आहार तथा उपचार सहायता देने पर वह सामान्य वजन का हो जाएगा। अतिरिक्त आहार आंगन बाडी केन्द्र मे ही देने की व्यवस्था की जाएगी। कम वजन के बच्चे की मां को भी इस कार्यक्रम से जोडा जाएगा। माताओ को शिशु जन्म से 1 वर्ष तक नियमित रूप से स्तनपान कराने के लिय प्रेरित किया जाएगा।
उन्होने बताया कि अतिरिक्त पोषण आहार का स्वाद मीठा है इसे अधिकतर बच्चे सरलता से खा लेगे। यदि कम वजन का बच्चा पोषण आहार खाने मे रूचि न दिखाये अथवा 1 सप्ताह पोषण आहार देने के बाद भी उसका वजन न बढे तो उसे एन.आर.सी मे भर्ती कराये। केसला मे शुरू मे 300 कम पोषित बच्चो को इस प्रोजेक्ट मे शामिल किया जा रहा है। प्रोजेक्ट को लागू करने के लिये परियोजना अधिकारियो, आंगनबाडी कार्यकर्ताओ ए.एन.एम तथा आशा कार्यकर्ताओ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रोजेक्ट समुदाय की भागीदारी पर आधारित है। महाराष्ट्र, केरल तथा राजस्थान राज्यो मे इस प्रोजेक्ट को अच्छी सफलता मिली है। इसे सफल बनाने के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कर्मचारियो मे समन्वय आवश्यक है। बैठक मे राज्य परियोजना संचालक सुश्री निधि निवेदिता मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दिलीप कटेलिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास संजय त्रिपाठी तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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