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सागर किनारे रहकर भी प्यासे हैं सैंकड़ों परिवार

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तवानगर के निवासियों की पेयजल संबंधी परेशानी का नहीं निकल रहा हल
ये हैं वर्तमान हालात
तवानगर में पाइप लाइन साठ वर्ष पुरानी जर्जर हो चुकी हैं
हैंडपंप सफल नहीं होते और उनका पानी पीने योग्य नहीं हैं
पीएचई ने नल-जल योजना में जनभागीदारी का नियम बताया
जल संसाधन कर्मचारियों के अलावा शेष सब अतिक्रमणकारी
इटारसी। तवानगर में करीब ढाई हज़ार जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों की संख्या के बावजूद जल संसाधन विभाग यहां पेयजल उपलब्ध कराने में खुद को असहाय बता रहा है और महज 605 अन्य रहवासियों को अतिक्रामक बताकर अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। यहां के रहवासियों की आबादी 5500 की मांग अनुसार प्रतिदिन एक व्यक्ति 40 लीटर के मान से कुल पानी की मांग करीब सवा दो लाख लीटर प्रतिदिन है। लेकिन वर्तमान में जल संसाधन विभाग पानी उपलब्ध कराने में खुद को असहाय बता रहा है। इधर तवा विकास महिला संगठन से जुड़ी महिला जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दे दी है कि यदि यहां के लोगों की पानी की सुविधा छीनी तो वे अपने पद से इस्तीफा देंगी और फिर आंदोलनों के माध्यम से प्रशासन की नाक में दम कर देंगी। बता दें कि यह संगठन पहले भी काफी उग्र आंदोलन कर चुका है। यहां तक की जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को आफिस में बंद करके ताला लगाने का कदम भी उठा चुका है।
it12417 (1)तवा के लोगों को पानी उपलब्ध कराने के दायित्व से जल संसाधन विभाग इनकार कर चुका है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री ने सीएम हेल्प लाइन में शिकायत के बाद हुई पूछताछ में लिख जवाबी पत्र से स्थिति स्पष्ट हो जाती है कि वे अपने विभाग के कर्मचारियों के अलावा पंचायत अंतर्गत आने वालों के लिए पानी का इंतज़ाम नहीं कर सकते हैं। पत्र में कहा गया है कि तवा कालोनी तवानगर में वर्तमान में निवासरत जल संसाधन विभाग के कुल 243 परिवार हैं जिनके लिए मूलभूत सुविधा के अंतर्गत विभाग द्वारा जल वितरण किया जाता है। इससे इस कार्यालय को प्रतिमाह लगभग 2.50 लाख रुपए खर्च आता है। तवानगर के अन्य रहवासी परिवारों के लिए जल सुविधा उपलब्ध कराना लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का दायित्व है। कर्मचारियों के लिए जल की व्यवस्था पूर्व परियोजना के तहत निरंतर चली आ रही है, जो विभाग के प्रावधान के तहत है लेकिन पंचायत एवं ग्रामवासियों को जल प्रदाय की व्यवस्था करना शासन के नियम से पीएचई के लिए प्रावधानित है अत: ग्राम पंचायत के निवासियों की जल व्यवस्था पीएचई से करायी जाए।
फिर सामने आया महिला संगठन
तवानगर में जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों के अलावा जो लोग निवास कर रहे हैं, वे कहां जाएं? गर्मियों में उनको भी मानवीयता के नाते पानी तो मिलना ही चाहिए। ये लोग खुद को नेताओं के हाथों ठगा मान रहे हैं। पंचायत के पंचों तक खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। नेता वोट लेने आते हैं, समस्या का समाधान उनके पास भी नहीं है। प्रशासन इन लोगों को अतिक्रमणकारी मानता है और यह मानकर व्यवस्था नहीं कर रहा कि इससे अतिक्रमणकारियों को बढ़ावा मिलेगा। तवा विकास महिला संगठन ने सन् 2008 से चल रहे आंदोलन को फिर से जीवित करने की योजना बनायी है। इसी के तहत एक बार फिर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को एक पत्र देकर कहा है कि इतने आंदोलनों और मांग के बावजूद आज तक पेयजल उपलब्ध कराने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। साठ वर्ष पूर्व जो पाइप लाइन डाली थी वे जर्जर हो गई और प्रदूषित पानी घरों में आता है। हैंडपंप का पानी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार पीने योग्य नहीं है। ग्राम पंचायत को तो जैसे इससे कुछ लेना-देना ही नहीं है, केवल आश्वासनों से प्यास नहीं बुझती है। पंचायत का कहना है कि पीएचई जनभागीदारी से पैसा जमा करने की शर्त पर नल जल योजना की बात करती है। ऐसे में हम कहां जाएं। यदि हमारी नहीं सुनी गई तो हम महिला जनप्रतिनिधि (संगठन से तीन पंच सदस्य हैं) अपना इस्तीफा सौंप देंगे।
इनका कहना है…!

जहां तक और जितना मेरी जानकारी में है, तो कर्मचारियों के अलावा जो लोग वहां रह रहे हैं, वे अतिक्रमणकारी हैं। यदि उनको सुविधाएं देना शुरु कर देंगे तो एक नई समस्या पैदा हो जाएगी। जहां तक मानवीयता का आधार है तो हम पूरे मामले को नए सिरे से देखकर जो हो सकता है, करने का प्रयास करेंगे।
अभिषेक गेहलोत, एसडीएम

ग्राम पंचायत से बात करेंगे, रानीपुर पंचायत के अंतर्गत रहने वालों के लिए पानी का इंतजाम करने के लिए कहेंगे। वैसे हमने पंचायत क्षेत्र में सौ घरों के बीच एक हैंडपंप खनन करने के लिए योजना बनायी है, जिससे ग्राम पंचायत के अंतर्गत रहने वालों को गर्मी में पेयजल के लिए परेशानी से बचाया जा सकेगा।
गनपत सिंह उईके, जनपद अध्यक्ष केसला

हमारी समस्या से किसी नेता-जनप्रतिनिधि को कोई लेना-देना नहीं है। वे तो केवल वोट लेने के लिए तवानगर आते हैं। चुनाव के वक्त ही उनको जनता की समस्या याद आती है और निराकरण का वायदा करते हैं, फिर भूल जाते हैं। शासन और प्रशासन की लापरवाही से समस्या का आज तक निदान नहीं हुआ है।
श्रीमती रीता सिंह, पंच एवं अध्यक्ष तवा विकास महिला संगठन

हां, हमने पत्र लिखा है कि अपने कर्मचारियों के अलावा व्यवस्था देने का दायित्व हमारा नहीं पीएचई का है। मूलभूत सुविधा बंद नहीं कर सकते इसलिए परियोजना बंद होने के बावजूद हम पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन, लोगों की नई पाइप लाइन डालने की मांग है, वह हम नहीं कर सकते हैं। एसडीएम साहब को भी सारी बातों से अवगत करा चुके हैं, पीएचई को व्यवस्था करना चाहिए।
पीके पाठक, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग तवा

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