गुजरात के सोमनाथ ज्योर्तिलिंग का पूजन अभिषेक हुआ
इटारसी। जीवन शिव के बिना अधूरा ही नहीं शव के समान है। शिव ही जगत के अधिष्ठाता है। महिला पुरूष शिव के उपासक होते है। यही कारण है कि परिवारों में मंगल और सुख शांति रहती है। उक्त उदगार मुख्य आचार्य पं. विनोद दुबे ने शिवार्चन के समय व्यक्त किये। आगामी 12 दिन तक चलने वाले इस आयोजन में बारह ज्योर्तिलिंग का पूजन और अभिषेक होगा। पूरे देश में 12 ज्योर्तिलिंग है जिसमें सागर तट पर दो, हिमालय और अन्य पर्वत क्षेत्रो में चार, नदी किनारे तीन और मैदानी इलाकों में तीन ज्योर्तिलिंग स्थित है। गुजरात के सौराष्ट्र भू भाग के वेरावल जनपद के प्रभास ग्राम में संसार भर में प्रसिद्ध सोमनाथ ज्योर्तिलिंग स्थित है।
पं. विनोद दुबे ने बताया कि सोमनाथ के मंदिर का घंटा 200 टन सोने का हुआ करता था। मंदिर में हीरे के छप्पन खंबे माणिक रत्न आदि से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा और अभिषेक के लिए गंगाजल प्रतिदिन हरिद्वार, प्रयाग, काशह से लाया जाता था। यहां पर कश्मीर से पूजन के लिए फूल लाये जाते थे। यहां प्रतिदिन की पूजन के लिए एक हजार ब्राम्हण नियुक्त किये गये थे। इस सोमनाथ मंदिर के लिए 10 हजार ग्रामों की जागीर भी रहती थी। जिसकी आमदनी से परिसर का खर्च चलता था।
प्रमुख आचार्य पं. विनोद दुबे ने कहा कि मोहम्मद गजनवी और खिलजी वंश सहित औरंगजेब ने इस मंदिर में काफी तोड़फोड़ की। बाद में हिन्दू रानी अहिल्या देवी होल्कर ने इस मंदिर का जीर्णाेद्धार कराया।
सावन के तीसरे सोमवार को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का पूजन एवं रुद्राभिषेक श्री राजेंद्र दुबे शिक्षक के द्वारा किया गया। मुख्य आचार्य पंडित विनोद दुबे ,आचार्य पंडित सत्येंद्र पांडेय एवं पंडित पीयूष पांडेय पूजन एवं रुद्राभिषेक करा रहे हैं। आयोजन में सुनील दुबे शिक्षक, अमित मौर्य, गोपाल नामदेव, नितिन अग्रवाल सहयोग कर रहे है।










