इटारसी। हिन्दू धर्म की दस महाविद्या में से चौथी मां भुवनेश्वरी देवी हैं, और उनके ही नाम पर ग्राम पांडरी में मां भुवनेश्वरी देवी दरबार समिति है, जो विगत दो दशक से नवदुर्गा की स्थापना कर रही है। इसके संस्थापक मदनलाल केवट (Madanlal Kewat) हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत की और लोग उनके साथ जुड़ते गये। हालांकि आज भी देवी की सेवा आराधना में सबसे अधिक समय और धन केवट ही खर्च करते हैं। शेष सदस्यों को जैसा समय मिलता है, जैसी स्थिति होती है, सहयोग करते हैं।
पथरोटा (Pathrota) से आर्डनेंस फैक्ट्री रोड (Ordnance Factory Road) पर ग्राम पांडुखेड़ी (Village Pandukhedi) में ये नौदेवियां स्थापित हैं। इस वर्ष मां की स्थापना और आराधना का बीसवा वर्ष है। मदन लाल केवट ने बताया कि मां की सेवा-आराधना में मानसिक संतोष और खुशी मिलती है। वे पूरे नौ दिन भक्तिभाव से सेवा करते हैं। आसपास के लोग इस कार्य में उनकी मदद करते हैं। समिति के सदस्यों का कहना है कि वे यथासंभव सहयोग करते हैं, सबसे अधिक सेवाकार्य मदनलाल केवट का ही होता है।
करीब बीस वर्ष पूर्व मदनलाल केवट ने जो भक्ति का पौधा लगाया था, आज पेड़ बन चुका है और आसपास के लोग भी उसमें सेवा करने आने लगे हैं। जिसे जब भी वक्त मिलता है, जैसी परिस्थिति होती है, इस महायज्ञ में आहुति डालने अवश्य आ जाता है। यहां देवी के नौ स्वरूपों की स्थापना की जाती है। भक्तों को जाकर मां के नौ रूपों के एकसाथ दर्शन अवश्य करना चाहिए।
नौ देवियों के एकसाथ दर्शन होते हैं, इस स्थान पर


Rohit Nage
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