प्रदेश सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए योजना का शुभारंभ किया। जिससें किसानों की आय में बढौत्तरी होगी। साथ ही उन्हें इससे कई लाभ भी मिलेंगे। सरकार ने पीएम कुसुम योजना मध्यप्रदेश (PM Kusum Yojana MP) के किसानों की आय को दुगना करने के लिए योजना की शुरुआत की गयी है। इस योजना का उद्देश्य किसानो को ऊर्जा संयंत्रों को स्थापित करके अतिरिक्त आय प्राप्त कराना है। 22 जुलाई 2019 को योजना की घोषणा की गयी थी। कुसुम योजना को चलाने के लिए मध्य प्रदेश ऊर्जा निगम लिमिटेड एजेंसी को काम सौंपा गया है।
मिलेगी बिजली
पीएम कुसुम योजना मध्यप्रदेश के अंतर्गत 500 किलोवाट के 2 मेगावाट बिजली बनाने तक के लिए सौर यंत्र लगाए जाएंगे। किसान सौर यंत्र के माध्यम से बिजली उत्पादित करेंगे तो वे अतिरिक्त बची हुयी बिजली को सरकार और गैर सरकारी बिजली उत्पादित कंपनियों को बेच सकते हैं। जिससे की उनके पास हर महीने आय के साधन उपलब्ध होंगे।
पीएम कुसुम योजना मध्यप्रदेश का कुल 60 प्रतिशत की सब्सिडी सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी इसके साथ ही 30 त्न आपको लोन के रूप में दिया जायेगा। योजना के लिए कुल 10 प्रतिशत उम्मीदवार को स्वयं ही देना होगा। पीएम कुसुम योजना देश के सभी राज्यों में लागू की जा रही है।
योजना के लिए दस्तावेज
1. आधार कार्ड
2. मोबाइल नंबर
3. मूल निवास प्रमाण पत्र
4. बैंक अकाउंट से जुडी जानकारी
5. आय प्रमाण पत्र
6. जिस खेत में सोलर पैनल लगाए जायेंगे उस खेत के कागजात
7. पासपोर्ट साइज फोटो
पीएम कुसुम योजना के घटक:
• पीएम कुसुम योजना के तीन घटक हैं और इन घटकों के तहत वर्ष 2022 तक 30.8 गीगावाट की अतिरिक्त सौर क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
o घटक A : भूमि पर स्थापित 10,000 मेगावाट के विकेंद्रीकृत ग्रिडों को नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों से जोड़ना।
o घटक B : 20 लाख सौर ऊर्जा चालित कृषि पंपों की स्थापना।
o घटक C : ग्रिड से जुड़े 15 लाख सौर ऊर्जा चालित कृषि पंपों का सौरीकरण (Solarisation)।
• इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा कुल 34,000 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
लाभ:
1. राज्यों की सहायता: इस योजना के तहत विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आपूर्ति के दौरान होने वाली विद्युत क्षति या ट्रांसमिशन हानि (Transmission Loss) को कम किया जा सकेगा।
a. राज्य सरकारों के लिये यह योजना सिंचाई पर सब्सिडी के रूप में होने वाले परिव्यय को कम करने का एक संभावित विकल्प हो सकती है।
b. इसके अलावा यह योजना राज्यों को अपने ‘अक्षय खरीद दायित्त्वों’ (RPO) के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगी।
2. किसानों की सहायता: यदि किसान अपने सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित अधिशेष विद्युत को बेचने में सक्षम होते हैं, तो इससे उन्हें बिजली बचाने के लिये प्रोत्साहित किया जा सकेगा और भूजल का उचित एवं कुशल उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
a. यह योजना किसानों को सौर जल पंपों (ऑफ-ग्रिड और ग्रिड-कनेक्टेड दोनों) के माध्यम से जल सुरक्षा प्रदान करने में सहायक हो सकती है।
3. पर्यावरण के संदर्भ में: इस योजना के तहत कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिये सौर चालित पंपों की स्थापना के माध्यम से सिंचित क्षेत्र में वृद्धि के साथ ही प्रदूषण में वृद्धि करने वाले डीज़ल पंपों के प्रयोग में कमी लाने में सफलता प्राप्त होगी।
a. साथ ही यह योजना छतों और बड़े संयंत्रों के बीच मध्यवर्ती स्तर सौर ऊर्जा उत्पादन के रिक्त स्थान को भरने में सहायक होगी।
चुनौतियाँ:
• इस योजना को व्यापक स्तर पर लागू किये जाने के मार्ग में एक बड़ी बाधा उपकरणों की स्थानीय अनुपलब्धता है। वर्तमान में स्थानीय आपूर्तिकर्त्ताओं के लिये पारंपरिक विद्युत या डीज़ल पंप की तुलना में सोलर पंप की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
• इसके अलावा ‘घरेलू सामग्री आवश्यकता’ (Domestic Content Requirements- DCR) संबंधी नियमों की सख्ती के कारण सौर ऊर्जा उपकरणों के आपूर्तिकर्त्ताओं को स्थानीय सोलर सेल (Solar Cell) निर्माताओं पर निर्भर रहना पड़ता है, हालाँकि वर्तमान में देश में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त घरेलू सोलर सेल निर्माण क्षमता नहीं विकसित की जा सकी है।
• इस योजना में छोटे और सीमांत किसानों की अनदेखी किये जाने का आरोप भी लगता रहा है, क्योंकि यह योजना 3 हॉर्स पावर (HP) और उससे उच्च क्षमता वाले पंपों पर केंद्रित है।
• इस योजना के तहत किसानों की एक बड़ी आबादी तक सौर पंपों की पहुँच सुनिश्चित नहीं की जा सकी है क्योंकि वर्तमान में देश के लगभग 85% किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं।
• विशेषकर उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भू-जल स्तर में हो रही गिरावट किसानों के लिये छोटे पंपों की उपयोगिता को सीमित करती है।
• केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में देश में लगभग 30 मिलियन कृषि पंप संचालित हैं जिनमें से लगभग 22 मिलियन विद्युत चालित, जबकि 8 मिलियन डीज़ल पंप चालित हैं।
• गौरतलब है कि वर्तमान में देश के कृषि क्षेत्र में वार्षिक विद्युत खपत लगभग 200 बिलियन यूनिट है, जो कि देश की कुल विद्युत खपत का लगभग 18% है।
• कृषि क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति को लेकर सरकार द्वारा भारी सब्सिडी दिये जाने के कारण सिंचाई के लिये खर्च की जाने वाली विद्युत की लागत बहुत ही कम होती है, जिसके कारण कई किसान अनावश्यक रूप से जल का दोहन करते रहते हैं। कृषि क्षेत्र में भू-जल का यह अनियंत्रित दोहन जल स्तर में गिरावट का एक प्रमुख कारण है।
• सिंचाई के लिये सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना करने के बाद भू-जल स्तर में गिरावट की स्थिति में उच्च क्षमता के पंपों को लगाना और भी कठिन तथा खर्चीला कार्य होगा, क्योंकि इसके लिये किसानों को पंप से साथ-साथ बढ़ी हुई क्षमता के लिये सोलर पैनलों की संख्या में वृद्धि करनी होगी।
• गौरतलब है तत्कालीन केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट की घोषणा के 20 दिनों के अंदर ही मार्च 2018 में इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी मिलने की बात कही गई थी जबकि इस योजना के लिये केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी फरवरी 2019 में प्राप्त हुई।
• हालाँकि वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा इसके तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप स्थापित करने और अन्य 15 लाख किसानों को अपने विद्युत चालित पंप के सौरीकरण में सहयोग देने की बात कहते हुए इस योजना के दायरे को बढ़ाने की घोषणा की गई।
विशेषताएं
• सोलर पम्प का प्रयोग सिंचाई के लिए किया जाएगा। इसको आप किसी को बेच नहीं सकते या इसमें किसी अन्य का हस्तांतरण नहीं किया जायेगा।
• यदि किसान के पास सिंचाई के लिए पहले से ही कोई स्थायी स्रोत है तो सोलर पम्प का उपयोग अपनी आवश्यकता के अनुसार ही करना होगा।
• योग्यता पात्रता के अनुसार विभाग द्वारा सहमति प्रदान करने के बाद ही आप आप सोलर यंत्र लगा सकते हैं।
• आपको आवेदन के समय ही राशि का भुगतान करना होगा।
• जब आपको सौर यंत्रो की आवश्यकता होगी तभी आप इनका उपयोग करेंगे। और इन यंत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसान की होगी। इसमें सरकार द्वारा कोई भी जिममेदारी नहीं ली जाएगी।
• सोलर पम्प को लगाने के बाद यदि यंत्रो में किसी भी प्रकार की समस्या आती है उसमें सरकार या विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं बनेगी।
• यदि एक बार ऊर्जा यंत्र लगा दिए जायेंगे तो उन्हें एक जगह से दूसरी जगह हस्तांतरित नहीं कर सकते।
• सोलर प्लेट लगाने के लिए धूप वाला स्थान उपलब्ध कराने की सारी जिम्मेदारी आवेदक किसान की होगी।
• सोलर प्लेट लगाने के बाद यदि उम्मीदवार किसान अपना मोबाइल नंबर बदलता है तो उन्हें इसकी जानकारी मध्य प्रदेश के ऊर्जा विभाग में देना आवश्यक होगा और अपना नया मोबाइल नंबर कार्यालय में दर्ज कराना होगा।
• पैनल के साफ़-सफाई की जिम्मेदारी उम्मीदवार की ही होगी।
• योजना में राशि प्राप्त होने के बाद 120 दिन बाद किसानों के खेत में सोलर प्लांट लगाए जाएंगे।
योजना के लिए ऐसे करें आवेदन
• सबसे पहले उम्मीदवार मुख्यमंत्री सोलर पंप की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
• उसके बाद आपकी स्क्रीन पर होम पेज खुल जायेगा आपको इसमें नवीन आवेदन करें के लिंक पर क्लिक करें दें।
• आपकी स्क्रीन पर नया पेज खुलेगा इसमें आपको अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा और आपके फोन में एक ओटीपी आएगा। आपको ओटीपी दर्ज करना होगा।
• फिर आपको स्क्रीन पर सामान्य जानकारी का एक फॉर्म मिलेगा जिसमें आपको आवेदक का नाम, जिले का नाम, पिता का नाम, तहसील, गांव, लोकसभा, विधानसभा, पिनकोड, मोबाइल नंबर, लिंग आदि जानकारी भरनी होगी और सुरक्षित करें के बटन पर क्लिक कर दें।
• फिर आपको आधार e-KYC, बैंक अकाउंट, जाति स्वघोषणा, जमीन से संबंधित, खसरे की जानकारी और सोलर पंप की जानकारी दर्ज कर दें। आपको एक-एक विवरण करके सभी जानकारी भरनी होगी।
• आप अंत में आवेदन को सुरक्षित करें के लिंक पर क्लिक कर दे। आपको रजिस्ट्रेशन नंबर आपके मोबाइल नंबर पर मेसेज के माध्यम से सूचित कर दी जाएगी अब आप पेमेंट प्रोसेस के लिए आगे बढ़ें।
• आपको पे नाउ के बटन पर क्लिक करना होगा।
• आपको ऑनलाइन पेमेंट करना होगा और सभी जानकारी भरनी होगी। आपका आवेदन पूरा हो जायेगा।









