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प्रदेश में 19 से 23 अगस्त तक पुन: अधिक वर्षा की संभावना

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नर्मदापुरम। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chouhan) ने कहा है कि प्रदेश में भारी वर्षा के कारण जो परिस्थितियां निर्मित हो गई थीं, उन्हें बेहतर प्रबंधन के आधार पर नियंत्रित कर लिया गया है। जनता की जिन्दगी की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रदेश में जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें सजग हैं तथा स्थिति पर नियंत्रण रखे हुए हैं। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की तिथि आगामी दो या तीन दिन में है, उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता पर अस्पतालों और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान (Chief Minister Shri Chouhan) नर्मदापुरम के एनआईसी से प्रदेश के जिलों से अतिवृष्टि और बाढ़ नियंत्रण के संबंध में वर्चुअली चर्चा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान (Chief Minister Shri Chouhan) ने कहा कि मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आगामी 19 से 23 अगस्त के मध्य भी अधिक वर्षा की संभावना है। नर्मदापुरम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक डॉ सीतासरन शर्मा, विधायक विजयपाल सिंह, विधायक ठाकुर दास नागवंशी, श्रीमती माया नारोलिया, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू महेंद्र यादव, कमिश्नर मालसिंह, आईजी श्रीमती दीपिका सूरी, डीआईजी जगत सिंह राजपूत, कलेक्टर श्री नीरज सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ गुरूकरण सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री मनोज सरियाम उपस्थित थे।

जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट बैठक से वुर्चअली जुड़े। मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव जल संसाधन एस.एन. मिश्रा मंत्रालय भोपाल से बैठक में वर्चुअली सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने विदिशा, सीहोर, बालाघाट, नर्मदापुरम, रायसेन, भोपाल, राजगढ़, नरसिंहपुर के अधिकारियों से वर्चुअली उनके जिले की जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि टीम मध्यप्रदेश वैज्ञानिक तरीके से आपदा प्रबंधन में दक्ष है। इसका उदाहरण, कारम डेम आपदा के प्रबंधन से स्पष्ट हुआ है। बेहतर प्रबंधन के परिणामस्वरूप भयावह स्थिति नहीं बन पायी और हम जनहानि के साथ-साथ पशुओं को बचाने में भी सफल रहे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अतिवृष्टि के परिणाम स्वरूप बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था में लगे मौसम विभाग, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ को बधाई दी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यदि बरगी, बारना, तवा और कोलार का पानी एक साथ छूटता तो जल प्लावन की स्थिति बन सकती थी। बुद्धिमता के साथ वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन करते हुए क्रमबद्ध रूप से बांधों से जल निकासी का प्रबंधन किया गया। जब तवा और बारना बांधों के गेट खुले थे तो बरगी बंद था। बरगी के गेट खुले तो तवा और बारना और के गेट बंद होंगे।

इस वैज्ञानिक प्रबंधन के परिणामस्वरूप क्षेत्र को गंभीर स्थिति से बचाने में सफलता मिली है। हमें यह वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन निरंतर करते रहना होगा। इससे आपदा प्रबंधन में मध्यप्रदेश देश में उदाहरण प्रस्तुत करेगा बांधों में 80 प्रतिशत भंडारण का निर्णय लिया गया है, 20 प्रतिशत की गुंजाइश छोड़ी गई है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जिलों द्वारा की गई व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि डूब में आने वाले संभावित स्थानों से लोगों को ऊँचे स्थानों पर शिफ्ट किया गया। नर्मदापुरम में राहत शिविर के निरीक्षण उपरांत वहाँ की व्यवस्था पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संतोष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सभी जिलों में राहत शिविरों की व्यवस्था रखी जाए। इसके साथ ही पशुओं की सुरक्षा के लिए भी जिला प्रशासन संवदेन शीलता के साथ कार्य करें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आपदा प्रबंधन में जनप्रतिनिधियों तथा नवनिर्वाचित पंचायत और नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर उनका सहयोग लिया जाए। सोशल मीडिया और जनसंचार के अन्य माध्यमों से अतिवृष्टि तथा बाढ़ की स्थितियों को जनता के साथ साझा किया जाए। इससे जनसामान्य को सतर्क करने और उनके द्वारा आवश्यक सावधानियां बरतने में सहायता मिलेगी। आपदा प्रबंधन में आदर्श समन्वय आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जिलों को अपना सूचना तंत्र मजबूत रखने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जिला प्रशासन को अपने क्षेत्र के सभी बांधों, तालाबों और जल संरचनाओं का परीक्षण कराने के निर्देश देते हुए कहा कि लगातार हो रही वर्षा और आगामी दिनों में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए तकनीकी अमले के साथ जल संरचनाओं का निरीक्षण और उनमें सीपेज आदि की संभावना पर नजर रखी जाए।

आगामी कुछ दिनों तक प्रतिदिन बांधों की मॉनीटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करें। मौसम के पूर्वानुमान सदैव सटीक नहीं होते, अत: तैयारी आवश्यक है। जिलों के पास पानी डिस्चार्ज का आंकलन पूर्व से ही है। अत: तद्नुसार सभी विभाग परस्पर समन्वय कर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। जिला प्रशासन बाढ़ राहत के लिए राशन, दवाएं, नाव, मोटरबोट, गोताखोर, बचाव दल, राहत शिविर, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमों को तैयार रखें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अतिवृष्टि के प्रबंधन और राहत के लिए सूक्ष्मतम बिन्दुओं पर ध्यान देते हुए विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

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