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बैंक काॅलोनी में बनाया वाॅटर बैंक

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इटारसी। नगर में हुई 170 सेमी से अधिक की वर्षा का जल कहां गया इसका उत्तर सटीक रूप से कोई नहीं दे सकता है, लेकिन बैंक काॅलोनी के क्वाॅटर नम्बर 12 की 600 वर्गफीट के क्षेत्रफल के आंगन में विगत 90 दिनों में एकत्र हुआ 97 हजार 200 लीटर से अधिक पानी आज भी आंगन के तल में है। ये सब हुआ है यहां निवासरत शिखा पाराशर की वैज्ञानिक सोच से।

उन्होंने वाॅटर हावेस्टिंग (Water Harvesting) के तकनीकी उलझन को सरल रूप में प्रस्तुत कर बैंक काॅलोनी (Bank Colony) को बना दिया वाॅटर बैंक। इस प्रयास को उन्होंने जल गुल्लक नाम दिया है। शिखा पाराशर का मानना है कि जब वाॅटरहावेंस्टिंग (Water Harvesting) के पाईप, रेत, कोयले और गिट्टी के लेयर को बताया जाता है तो आम आदमी इसे उलझन और खर्चीला मानते हुये उसका सैद्धांतिक समर्थन तो करता है लेकिन इसे अपनाता नहीें है।

लेकिन शिखा द्वारा अपनाया तरीका न केवल सस्ता है बल्कि किसी वैज्ञानिक तकनीक (Scientific Technology) की उलझन नहीं है। इसमें आंगन में एकत्र हुआ पानी उस संरचना में ठीक उस प्रकार खिंचता जाता है जैसे किसी कोल्डडिंक को स्टा द्वारा सोखते हुये देखा जाता है।

इसमें आंगन के ढ़ाल वाले सिरे पर एक 12 फीट की काॅलम जैसे खुदाई करवा कर उसमें तत्काल गिट्टी भर दी गई। इस प्रकार 12 फीट गहरा एक फीट व्यास का एक सोख्ता गड्ढ़ा तैयार हो गया। यह 90 दिन की बरसात से तृप्त होने के भी बाद 20 सेकंड में एक बाल्टी पानी को पी लेता है। यह पानी कहीं और न जाकर इस ही क्षेत्र के भूजल स्तर को बढ़ाने का काम कर रहा है। इसको बनाने में मात्र 1500 रूपये का खर्च आया और समय भी 4 घंटे लगा।
शिखा का मानना है कि अगर हर आंगन में जल गुल्लक बनाई जाये तो संभव है गर्मी में टेंकर पर निर्भरता कम हो सकेगी।

आंगन की लंबाई = 900 सेमी
आंगन की चैड़ाई = 600 सेमी
आंगन में गिरा वर्षा जल = 180 सेमी
एकत्र जल का आयतन = लंम्बाई x चैड़ाई x उंचाई
= 900 x 600 x 180
= 97,200,000 घन सेमी
= 97,200 लीटर

 

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