नर्मदापुरम/इटारसी। सोसायटी फॉर प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर (Society for Private School Director) मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) एवं प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन (Private School Association) के संयुक्त तत्वावधान में आज पीपल चौक होशंगाबाद (Peepal Chowk Hoshangabad) में राज्य शिक्षा केंद्र की मनमानी, शिक्षा विभाग के भेदभावपूर्ण बोर्ड एक्जाम, दोषपूर्ण परीक्षा प्रणाली व निजी स्कूलों को नुकसान पहुंचाने वाले वैल्यूशन प्रोग्राम के विरोध में एक चेतावनी धरना आयोजित किया। तत्पश्चात कलेक्टर (Collector), तहसीलदार (Tehsildar)व डीपीसी को ज्ञापन दिया।

पांचवी और आठवीं की गुणवत्ता सुधार के नाम से सिर्फ मप्र में लाखों बच्चों अभिभावकों व स्कूल संचालकों को शासन द्वारा छला गया है, सिर्फ निजी स्कूलों के प्रति द्वेष रखने इस योजना को अमली जामा पहनाया गया है जिसका मप्र के सभी शिक्षा संगठन विरोध करते हैं। शासन को सोपास व प्राइवेट स्कूल संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत 5 वीं 8 वीं के विषय पर शासन ने सहयोग नहीं किया तो पूरे प्रदेश में शासन का विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।
ये बतायीं अनियमिमताएं
पूरे प्रदेश में पांचवी आठवीं परीक्षा अव्यवस्थित ढंग से संपन्न होने के बाद मूल्यांकन में हिंदी माध्यम स्कूलों के शिक्षकों को उपयोग कर अंग्रेजी माध्यम के प्राइवेट स्कूल के छात्र छात्राओं की कॉपी चेकिंग में जानबूझकर लापरवाही बरती जिसका परिणाम है कि सरकारी स्कूल के बच्चे अव्वल का समाचार प्रकाशित हुआ। कापियों को संकुल स्तर पर बच्चों को देखने की व्यवस्था की जाए एवं पुनर्मूल्यांकन किया जाए, जो अभी मूल्यांकन केंद्र स्तर पर है। अंकसूची में तकनीकी त्रुटियां हैं जिसे अविलंब सुधार की आवश्यकता है। अर्धवार्षिक और प्रोजेक्ट परीक्षा के अंकों की प्रविष्टियों के लिए सुधार के लिए अवसर दिया जाए तो लाखों बच्चे इससे लाभ ले सकते हैं। आंतरिक परीक्षा में बच्चे तकनीकी त्रुटि के कारण फेल हैं जो पुन: परीक्षा उपरांत भी सही नहीं हो सकता।
- बोर्ड पैटर्न परीक्षा बोर्ड परीक्षा के कुछ नियमों को लागू कर छात्रों को राहत प्रदान करें जैसे कृपांक और बेस्ट फाइव ऑप्शन। पांचवी, आठवीं परीक्षा को आधिकारिक आदेश से स्पष्ट किया जाए कि यह बोर्ड परीक्षा नहीं है जिसकी अंकसूची का उपयोग जन्मतिथि सुधार या अन्य कार्यों में नहीं हो सकता क्योंकि यह परीक्षा बोर्ड पैटर्न परीक्षा है।
पुन: परीक्षा जिस प्रकार अर्धवार्षिक परीक्षा राज्य शिक्षा केंद्र के प्रश्न पत्र पैटर्न पर आधारित थी उस आधार पर स्कूल स्तर पर आयोजित की जाए और अंकों की प्रविष्टि पोर्टल पर हो सके जिससे बच्चों की मानसिक स्थिति में सुधार हो। शासन के प्रयोग से प्रदेश के बच्चे, पालक मानसिक रूप से अत्यंत परेशान हैं। - नवीन शिक्षा नीति में यह बोर्ड पैटर्न परीक्षा का प्रावधान नहीं है परंतु जो आगामी वर्ष का पांचवी आठवीं बोर्ड पैटर्न परीक्षा के आदेश जारी किया है उसमें सभी स्कूल के बच्चों को शामिल किया जाए क्योंकि प्रदेश में गुणवत्ता से समझौता भेदभाव की श्रेणी में होगा। सीबीएसई स्कूल की पांचवी आठवीं की अंकसूची की मान्यता राज्य शिक्षा केंद्र मध्य प्रदेश शासन के बोर्ड पैटर्न से समकक्ष हो गई है।
- मेडिकल कॉलेज में एवं अन्य संस्थान में केवल सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राओं को 5 प्रतिशत रिजर्वेशन प्राइवेट स्कूल में पढऩे वाले होनहार छात्र छात्राओं के प्रति अन्याय है। मध्यप्रदेश में निजी गैरअनुदान प्राप्त विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता को प्रदेश में बढ़ाने के लिए साथ-साथ कार्य करते हैं कृपया विभिन्न स्कूलों में भेदभाव समाप्त किया जाए। जहां एक और ग्रामीण क्षेत्रों में एक बच्चे पर सरकार 100000 रुपए खर्च कर रही है, वहीं शिक्षा के अधिकार अधिनियम के 3 वर्ष की फीस प्रतिपूर्ति देने में असमर्थ है जिसे प्राथमिकता से कानून के आधार पर 22-23 तक तत्काल प्रदान किया जाए। शीघ्र कार्यवाही नहीं होने पर 1 सप्ताह उपरांत प्रदेश में होने वाले छात्र पालक और विद्यालयों के आंदोलन के लिए मध्यप्रदेश शासन एवं राज शिक्षा केंद्र जवाब देह होंगे।
- इस अवसर पर सोपास प्रदेश संगठन मंत्री रवि राजपूत, अध्यक्ष आलोक राजपूत, पीएसए जिलाध्यक्ष शिव भारद्वाज, राजेश दुबे, पीएसए इटारसी अध्यक्ष जाफर सिद्धिकी, देवी सिंह राजपूत, रिज़वान हैदर, आशुतोष गुप्ता, आलोक गिरोटिया, कमलेश गुप्ता, मुकेश सोना, सूरत सिंह, एचजी शुक्ला, अनीस सराठे, राजेन्द्र सिंह पवार, प्रशांत चौबे, चिंटु जैन, लोकेन्द्र साहू, घनश्याम, अशफाक खान, राहुल जोशी, अभिषेक दुबे, अनुज दीवान, अतुल बिल्लौर, राकेश दुबे, नीलेश जैन, धर्मेन्द्र रणसूरमा सहित अनेक स्कूल संचालक मौजूद रहे।









