इटारसी। नगर के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी मजीद खान पिता अब्दुल खान उम्र 56 वर्ष को एक नाबालिग बालक के साथ प्रकृति के विरुद्ध यौन अपराध करने का दोषी पाते हुए आरोपी को धारा 377 भारतीय दंड विधान में आजीवन कारावास की सजा एवं दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
आरोपी को धारा 323 के लिए एक साल का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इसी प्रकार धारा 506(2) भादवि के लिए 7 साल की सश्रम कारावास की सजा एवं 2 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं चुकाए जाने पर आरोपी को सभी धाराओं में एक-एक साल के सश्रम कारावास और भुगतना होगा।
इस पुराने एवं गंभीर प्रकरण की पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक राजीव शुक्ला ने बताया कि 26 फरवरी 97 को फरियादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह रिक्शा चलाता है। आज रात को 8 बजे आरोपी मजीद ने जेएसआर अस्पताल इटारसी में डॉ. साहब के बैठने वाले कमरे के पीछे ले जाकर आरोपी ने हाथ मुक्के से पहले मारपीट की फिर अपने पास रखा चाकू निकालकर मेरे को डराया और कहने लगा की अपने कपड़े उतार दो। मना किया तो उसने मेरा पेंट जबरन उतरकर मेरे साथ दुष्कर्म किया। घटना मेरे दोनों साथियों अजय एवं मेघराज ने देखी है। फिर मैंने थाने में अपने पिता के साथ जाकर आरोपी के विरुद्ध एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इस घटना के बाद आरोपी मजीद 20 अगस्त 97 को घटना के बाद फरार हो गया था। जिसके चलते हुए उसके विरुद्ध कोर्ट ने बेमियादी वारंट जारी किया था जिसके परिपालन में आरोपी को 16 अक्टूबर 23 को 26 साल बाद गिरफ्तार किया था, तबसे लेकर निर्णय दिनांक तक न्यायिक अभिरक्षा में ही रहा है। इस तरह वह 26 साल तक फरार रहा है। आरोपी को सभी धाराओं में एक साथ सजा भुगताई जाएगी तथा निरोध की अवधि को सजा में समायोजित की जाएगी।
आरोपी को सजा वीसी पर उपस्थित कर सुनाई है। आरोपी का सजा वारंट केंद्रीय जेल भेज दिया गया है। आरोपी घटना के बाद से ही फरार हो गया था। उसका पहला फरारी पंचनामा 16 दिसंबर 97 को बनाया गया था। अपराध क्रमांक 130/97 दिनांक 26 फरवरी 97 फरियादी मुकेश की मौत 3 मार्च 13 को एवं उसके पिता की मौत 10 अक्टूबर 10 को हो गईं थीं लेकिन उन दोनों ने अपने कथन 30 अगस्त 2006 को कोर्ट में दर्ज कराए थे। आरोपी घटना के बाद से ही इटारसी से फरार हो गया था।







