इटारसी। आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में जहां परिवारों के बच्चे कम उम्र में ही नैतिक मूल्यों और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं, वहीं शहर के सिंधी कालोनी निवासी 12 वर्षीय लक्ष्य नंदवानी ने परिवार से मिली अच्छी सीख और धर्म आध्यात्म ज्ञान के बल पर कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। चेतीचांद महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में लक्ष्य ने हनुमान चालीसा पर शानदार नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। उनका कहना है कि ये सब उनके हनुमान जी ने ही कराया है।
इतनी कम उम्र में लक्ष्य की प्रतिभा और उसकी मुद्राएं देखकर लोग दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो जाते हैं। सिंधी कालोनी निवासी प्रिया-विशाल नंदवानी के पुत्र लक्ष्य सेंट जोसफ कान्वेंट स्कूल में सातवीं के छात्र हैं। इसके पहले भी लक्ष्य ने कई सामाजिक कार्यक्रमों में विभिन्न गीतों पर अपनी प्रस्तुति दी है। नृत्य के अलावा लक्ष्य को प्यानो, गिटार बजाने का शौक है, इसमें भी वह धार्मिक भजनों की धुनों को प्राथमिकता देते हैं। लक्ष्य का कहना है कि यह नाम उसके दादाजी स्व. बालकृष्ण नंदवानी जी ने रखा है, इसलिए वैज्ञानिक बनना उनका लक्ष्य है। लक्ष्य कहते हैं कि मैं किसी भी ऊंचाई पर पहुंच जाऊं, लेकिन अपने परिवार और ईश्वर को सदैव याद रखूं। परिजनों ने बताया कि डांस-गाने के साथ ही लक्ष्य अपनी पढ़ाई पर भी पूरा फोकस करता है।
लक्ष्य ने अपनी डांस परफॉर्मेंस देने से पहले कहा था कि यह केवल डांस परफॉर्मेंस नहीं है बल्कि हनुमान जी के लिए उसकी अपार भक्ति है। परिवार में बचपन से ही उसे माता-पिता, दादा-दादी औऱ नाना-नानी से अच्छे संस्कार दिए, जिसकी झलक उसके व्यवहार, बोलचाल और नृत्य में देखने को मिलती है। आज के बच्चों से दूर होते संस्कारों को लेकर लक्ष्य ने कहा कि हम भले ही कितनी तरक्की कर लें, लेकिन हमें अपने धर्म, संस्कृति, नैतिक मूल्यों से जुड़कर ही रहना पड़ेगा। आज बच्चों को अपने परिवार के बुर्जुगों की सीख बोझ लगती है, लेकिन यही बुजुर्ग बरगद के वृक्ष हैं, जिन्होंने कठिन संघर्ष करते हुए अपना पूरा जीवन बिताया है, इनसे हमेशा कुछ अच्छा ही सीखने को मिलता है, इसलिए हर परिवार में बच्चों को कुछ समय अपने परिवार के बुर्जुगों के साथ बिताना चाहिए।
मोबाइल के बढ़ते चलन को लेकर लक्ष्य ने कहा कि विज्ञान की हर खोज अच्छाई और बुराई दोनों समेटे रहती है, यह हम पर निर्भर करता है कि हम उस सुविधा का कहां उपयोग कर रहे हैं। लक्ष्य के पिता विशाल एवं मां प्रिया का कहना है कि हमारे परिवार में उनकी नानी दीप्ति लखानी और मौसी दिव्या ने उनके बच्चों को बचपन से ही धर्म आध्यात्म से जोड़कर रखा है। नियमित रूप से माथे पर टीका लगाना, भजन-कीर्तन करना, मंदिर जाना बड़ों का सम्मान करना जैसी सीख हमने बचपन से ही लक्ष्य को सिखाई है, आज युवा पीढ़ी तेजी से भारतीय मूल्यों और संस्कारों से दूर हो रही है, उन्हें बचपन से ही अच्छे संस्कार दिए जाना चाहिए।








