इटारसी। शासकीय कन्या महाविद्यालय, इटारसी में आज विकसित भारत के लिए मानव पूंजी हेतु परिचर्चा में उच्च शिक्षा में नीतिगत अंतर और चुनौतियां, संभावनाएं-समाधान एवं श्रेष्ठ प्रथाएं विषयों पर प्राध्यापकों ने विचार रखे। प्राचार्य डॉ. आरएस मेहरा ने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष में उच्च शिक्षा नीतिगत परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, लेकिन इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। संसाधनों की सीमाएं, शिक्षक भर्ती की अनियमितता और डिजिटल असमानता जैसे मुद्दों पर जमीनी स्तर पर ठोस रणनीतियां अपनानी होगी।
आइक्यूएसी प्रभारी डॉ. हरप्रीत रंधावा ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने नीति निर्माण के साथ आवश्यक है उसका समर्पित पारदर्शी और निरंतर क्रियान्वयन होना। आज कॉलेजों में शैक्षिक नवाचार, आईसीटी आधारित शिक्षण और सतत मूल्यांकन की आवश्यकता पहले से अधिक है। कार्यक्रम संचालक डॉ. हर्षा शर्मा ने कहा कि शासन को नीति स्तर पर शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु ठोस कदम उठाने होंगे। स्नेहांशु सिंह ने कहा कि कॉलेज को नवाचार, डिजिटलीकरण और कौशल विकास के क्षेत्र में ठोस पहल करनी होगी।
कार्यशाला में डॉ. शिरीष परसाई ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, अतिथि विद्वानों की स्थिति और कॉलेजों में प्रशासनिक जटिलताओं पर चर्चा की। डॉ शिखा गुप्ता एवं अनिल मोहबे ने भी विचार व्यक्त किये। इस परिचर्चा से निकले श्रेष्ठ सुझावों को जिला स्तर पर और फिर नवंबर में होने वाली सचिव स्तर की राष्ट्रीय संगोष्ठी में विचार हेतु रखा जाएगा। कार्यक्रम में श्रीमती मंजरी अवस्थी, रविंद्र चौरसिया, डॉ मुकेश चंद्र विष्ट, डॉ. संजय आर्य, डॉ. श्रद्धा जैन, डॉ नेहा सिकरवार, हेमंत गोहिया, तरुणा तिवारी, क्षमा वर्मा, करिश्मा कश्यप एवं एनआर मालवीय उपस्थित थे।








