इटारसी। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लगे वन क्षेत्र में शुक्रवार को एक और बाघ की मौत हो गई। तवा नदी के किनारे बड़-चापड़ा घाट पर सुबह करीब 10.30 बजे गश्ती दल ने बाघ का शव पानी में देखा। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने शिकार की आशंका जताई है। सूचना मिलने के बाद, एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा, डीएफओ मयंक गुर्जर, वाइल्डलाइफ डॉक्टर गुरुदत्त शर्मा और एसडीओ विनोद वर्मा सहित डॉग स्क्वॉड की टीम मौके पर पहुंची।
दस दिन में दूसरी घटना, सुरक्षा पर उठे सवाल
जिले में पिछले दस दिनों में बाघ की यह दूसरी मौत है। इससे पहले, 12 अगस्त को मढ़ई के कोर क्षेत्र में एक बाघ पानी में मृत मिला था। उस समय अधिकारियों ने मौत का कारण आपसी संघर्ष बताया था। हालांकि, शुक्रवार को बाघ का शव जिस क्षेत्र में मिला है, वह वन विकास निगम के अंतर्गत आता है और कोर व बफर क्षेत्र से दूर है, जिससे आपसी संघर्ष की संभावना कम मानी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता
पिछले दो महीनों में एसटीआर में एक बाघ और एक तेंदुए की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद, वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भी बाघ के शिकार के मामले सामने आ चुके हैं। जून 2022 में शिकारी एक बाघ की गर्दन काटकर ले गए थे। बाघों और तेंदुओं की बढ़ती मौतों ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
इनका कहना है…
निश्चित तौर पर शिकार हुआ है, पंजा कटा है और गले में तार भी मिला है। फिलहाल पोस्टमार्टम कराके शवदाह करा दिया है। अब जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जाएगी। पानी में शव मिला है, तो हो सकता है कहीं से बहकर आया होगा, यह एसटीआर के बाहर मिला है।
विनोद वर्मा, एसडीओ चूरना









