इटारसी। शिक्षा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक पहल करते हुए, इटारसी के दो प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान, सेंट जोसेफ कॉन्वेंट और सेंट मेरीज को-एड स्कूल, सितंबर माह से अपने छात्रों के लिए हस्तलिपि विज्ञान (ग्राफोलॉजी) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने जा रहे हैं। भारत में पहली बार कोई स्कूल इस विज्ञान को छात्रों की सीखने की क्षमता और समग्र विकास को बढ़ाने के लिए उपयोग करेगा।
शशिकांत वाणी : एक वैज्ञानिक सोच वाले समाजसेवी
इस नवाचार के पीछे इटारसी के ही निवासी श्री शशिकांत वाणी हैं, जो मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के एक सेवानिवृत्त अभियंता हैं। अपनी समर्पित कार्यशैली और मृदुभाषिता के लिए जाने जाने वाले वानी अपने सेवाकाल में कई बार पुरस्कृत हो चुके हैं। वे लंबे समय से एक शौक के रूप में हस्तलिपि विज्ञान का गहन अध्ययन और अभ्यास कर रहे हैं। इस विषय में उनकी विशेषज्ञता इतनी है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उनसे मार्गदर्शन लेने वाले लोग मौजूद हैं।
श्री वाणी ने बताया कि हस्तलिपि विज्ञान एक ऐसा अप्रचलित, लेकिन महत्वपूर्ण विज्ञान है, जो किसी व्यक्ति की लिखावट और हस्ताक्षर का विश्लेषण करके उसके व्यक्तित्व के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को उजागर कर सकता है। उन्होंने अपने अनुभव से यह भी साबित किया है कि लिखावट और हस्ताक्षर में सुधार करके व्यक्ति अपने अंदर की नकारात्मकता और शारीरिक कष्टों से भी छुटकारा पा सकता है। इसी सिद्धांत का उपयोग अब वे छात्रों के लिए करने जा रहे हैं।
शैक्षणिक नवाचार का उद्देश्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों की मदद करना है, जिन्हें पढऩे-लिखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। श्री वाणी ने बताया कि हस्तलिपि और हस्ताक्षर में छोटे-छोटे सुधार करके ऐसे छात्रों की सीखने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सेवा पूर्णत: नि:शुल्क होगी और इसमें उनके कुछ युवा शिष्य भी सहयोग करेंगे।
श्री वाणी के लिए इस कार्य का विशेष महत्व है क्योंकि वे अपने बचपन के स्कूल, सेंट जोसेफ कॉन्वेंट से इस पुनीत कार्य का शुभारंभ कर रहे हैं। उन्होंने सेंट जोसेफ्स और सेंट मेरीज को-एड स्कूलों के प्रबंधन का आभार व्यक्त किया और आशा जताई कि भविष्य में हस्तलिपि विज्ञान युवाओं के लिए ज्ञान प्राप्ति और रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा।
यह पहल न केवल इटारसी के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह पूरे देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान कर सकती है, जहाँ पारंपरिक विषयों के अलावा छात्रों के समग्र विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।









