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लगेज स्केनर कई घंटो बंद, बिना चैकिंग निकल रहे थे यात्री

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हो रहा शहर की सुरक्षा के साथ खिलवाड़
इटारसी। किसान आंदोलन की चेतावनी के एक दिन पहले शनिवार को जहाँ पूरे शहर के चप्पे-चप्पे पुलिस बल तैनात कर स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे, वहीं आज शहर में ऐसा लग रहा था, जैसे कुछ हुआ ही नही हो। एक सप्ताह पूर्व किसान आंदोलन में किसान की मौत को लेकर बाजार बंद किया था, वहीं शनिवार को किसान आंदोलन के वाट्सअप मैसेज के बाद शहर में भारी पुलिस बल तैनात देखा गया, लेकिन उसके एक दिन बाद ही पुलिस प्रशासन की लापरवाही देखी। जिसका जीता-जागता उदाहरण रेल्वे स्टेशन से लगे लगेज स्केनर पर देखा गया। जहाँ लगेज स्केनर घंटों बंद रहा और यात्री बिना सामान चैकिंग निकल रहे थे।
सैकड़ों ट्रेनें करती हैं आवागमन
इटारसी रेल जंक्शन होने के कारण यहाँ रोजाना चारों दिशाओं में सैकड़ों ट्रेने आवागमन करती है, जिसके कारण इटारसी रेल्वे स्टेशन से हजारों की संख्या में यात्री आवागमन करते है, ऐसे में सुरक्षा के लिहाज इटारसी जंक्शन महत्पपूर्ण माना जाता है। यहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना बहुत जरूरी, शायद इसी कारण स्टेशन क्षेत्र में 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाये है, और यात्रियों के सामान चैकिंग के लिए लगेज मशीन। लेकिन देखने में आया कि स्टेशन की सुरक्षा में लगी इस लगेज मशीन को सही ढंग से आपरेट नहीं किया जाता है, अधिकांश समय या तो बंद दिखाई देती है, या फिर सभी यात्रियों की चैकिंग नहीं की जाती है।
आरक्षकों की लापरवाही
स्टेशन पर लगे लगेज स्केनर पर बैठने वाले आरक्षकों की लापरवाही साफ तौर पर देखने को मिलती है, आधे से अधिक समय यह आरक्षक या तो मोबाईल में व्यस्त रहते है, या फिर कुछ बुजुर्ग आरक्षकों को स्केनर मशीन के रूम में सुस्ती अवस्थाध में देखा जा सकता है। कुछ आरक्षक यात्रियों के चेहरे देखकर सामान चैकिंग के लिए रखवाते है, जबकि कुछ अपनी डयूटी से नदारत मिलते हैं।
लिफ्ट के रास्ते बिना चैकिंग जाते यात्री
इटारसी स्टेशन पर जबसे यात्री लिफ्ट लगी है, तब से शायद ही कोई यात्री हो जो इससे ऊपर जाना पसंद नहीं करता हो, ऐसे में संदिग्धे यात्री भी बिना लगेज मशीन पर सामान चैक करवाये आसानी से लिफ्ट की द्वारा स्टेशन क्षेत्र में प्रवेश कर लेते हैं ऐसे में लगेज स्केनर मुसाफिर खाने में लगे होने का मतलब ही नहीं रह जाता है। रेल्वे ने लिफ्ट बुजुर्ग और विकलांगों के लिए लगाई थी, लेकिन इसका फायदा अवैध वेंडर से लेकर संदिग्धस लोग तक उठा रहे है। लेकिन जीआरपी एवं आरपीएफ का इस ओर ध्यान नही जाता है।
स्टेशन पर अवैध वसूली
स्टेशन क्षेत्र में खुलेआम अवैध वेडरिंग का कार्य जारी है जो रेल्वे की सुरक्षा में लगे आरक्षकों की नाक के नीचे हो रहा है। और फिर कभी कभी यही अवैध वेंडर, चोरी एवं डकैती जैसी घटनाओं को ट्रेन में अंजाम देकर साफ बच निकलते है, बावजूद ऐसे अवैध वेंडरों पर केवल नाममात्र के लिए कार्यवाही की जाती है। अवैध वेंडर से लेकर रोजाना किराना सामान ले जाने वालों से आरपीएफ एवं जीआरपी आरक्षकों की अवैध वसूली कोई नई बात नहीं है, और यही कारण है कि यह बेखौफ होकर ट्रेनों में अवैध सामान लेकर सफर करते है।
होटलों का खाना पहुंचता से आसानी से
शहर की तमाम होटलों को खाना ट्रेनों में बिना रोकटोक के मुहैया कराया जाता है, होटल के वेटर बिना किसी रोकटोक के होटल से खाना ले जाकर ट्रेनों में पहुंचा देते है इसका कारण हर किसी का इन वेटरों और होटल मालिक से मिला होना हो सकता है और यही कारण है कि किसी भी होटल से आने वाले लडक़ों की चैकिंग नहीं की जाती है, कि यह खाने में साथ-साथ ट्रेनों में क्या-क्या पहुंचा रहे है।
शनिवार का दिन
station ITकिसान आंदोलन को लेकर वाट्सअप पर वायरल हुये मैसेज के बाद रेड अलर्ट के चलते प्रशासन तुरंत हरकत में आया था, जिसके बाद जिले की पुलिस, होमगार्ड, वन आरक्षक, एनसीसी कैडिट, नगर रक्षा समिति, जीआरपी, आरपीएफ को शहर के चप्पे-चप्पे में लगाया गया था, हर आने-जाने वाले की सघन चैकिंग की जा रही थी। रेल्वे स्टेशन को भी संदिग्धर मानकर स्टेशन क्षेत्र में लगेज स्केनर एवं डॉग स्काड की मदद से चैकिंग की जा रही थी।
रविवार का दिन  
station IT 2रिपोर्टर द्वारा आज जब स्टेशन पर पड़ताल की गयी तब लगेज स्केनर के पास खड़े यात्रियों और कुलियों ने बताया कि दोपहर से ही लगेज स्केनर इसी अवस्था में है और अधिक पड़ताल के लिए हमारे रिपोर्टर ने वही लगभग 2 घंटे व्यतीत किये। परंतु तब भी आरपीएफ का कोई जवान या अधिकारी वहां नहीं पंहुचा लगभग सवा पांच बजे आरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल वहां आयीं जिन्होंने स्केनर बूथ का दरवाजा खोला और स्केनर को चालू करके अंदर बैठ गयी और लोग आते जाते रहे। किसी से किसी भी प्रकार की पूछताछ या तलाशी नहीं ली जा रही थी। इसी बीच कुछ लोग ऐसे भी थे जो स्वयं स्केनर में अपने सामान को रख कर चेक करवा रहे थे, परंतु उनकी संख्या एक सैकड़ा पर बमुश्किल पांच या छ: होती थी। बाकि के सभी यात्री बेरोकटोक आते जाते रहे। अगर यही महिला अधिकारी स्केनर के पास खड़ी हो जाती तो लोग ऐसे ही पुलिस देखकर अपना सामान स्केन मशीन में रख दिया करते परंतु न ही वह महिला कांस्टेबल बाहर आई और न ही शाम तक कोई अन्य आरपीएफ का जवान या अधिकारी वहा आया।
तमाम घटनाक्रम को लेकर आरपीएफ प्रभारी हेतराम महावर से बातचीत करना चाहा तो वह बात करने से बचते रहे और अन्य अधिकारी से बातचीत करने की कहते रहे।

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