इटारसी। शासकीय एमजीएम पीजी महाविद्यालय इटारसी में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ और जन्तु विज्ञान विभाग के संयुक्त प्रयास से मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया।
युवाओं को स्वरोजगार की प्रेरणा
अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश महेता ने की। इस दौरान मधुभूमि नेचुरल प्रोडक्ट्स के संस्थापक, युवा इंजीनियर मृत्युंजय रॉय ने विद्यार्थियों को मधुमक्खी पालन और शुद्ध शहद के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आजकल बाजार में मिलने वाले शहद में अक्सर सिरप मिलाया जाता है, जबकि प्राकृतिक शहद स्वास्थ्य के लिए अमृत समान होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘यदि हर घर से एक युवा स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाएगा तो भारत आत्मनिर्भर बनेगा।’
नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
श्री रॉय ने प्रोजेक्टर के माध्यम से मधुमक्खी पालन के व्यवसायिक अवसरों को समझाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कार्य युवाओं को कैसे आत्मनिर्भर बना सकता है। प्राचार्य डॉ. राकेश महेता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के क्षेत्र में भी स्वावलंबी बनाना बेहद जरूरी है।
जिले की पहली हनी प्रोसेसिंग यूनिट
यह भी उल्लेखनीय है कि मृत्युंजय रॉय 2020 से मधुमक्खी पालन का कार्य कर रहे हैं और हाल ही में उन्होंने इटारसी के मालवीय गंज में जिले की पहली हनी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की है। इस यूनिट के माध्यम से जिले और प्रदेश भर में उपभोक्ताओं को शुद्ध और लैब-टेस्टेड शहद उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम में डॉ. पीके अग्रवाल, डॉ. सुसान मनोहर, डॉ. अरविंद शर्मा, डॉ. रश्मि तिवारी, डॉ. अर्चना शर्मा, डॉ. अशुता कुजूर, डॉ. बसा सत्य नारायण, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. मनीष चौरे, सुरेश गुप्ता, डॉ. आशुतोष मालवीय, संजीव कैथवास, कार्तिक पटेल सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।









