इटारसी। कांग्रेसियों ने पंडित भवानीप्रसाद मिश्र ऑडिटोरियम के निर्माण कार्य में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेस वार्ता कर भाजपा शासित नगर पालिका और पूर्व व वर्तमान अधिकारियों पर ठेकेदारों से मिलीभगत का आरोप लगाया है।
कांग्रेस नेता अमोल उपाध्याय, संतोष गुरयानी, पंकज राठौर और अशोक जैन ने इस मामले में कमिश्नर, कलेक्टर, नगरीय प्रशासन आयुक्त और आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में जांच के लिए शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।
आरोप : एक ही काम का दो बार हुआ भुगतान
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, ऑडिटोरियम के लिए 19 फरवरी 2014 को 2.67 करोड़ रुपये की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। इसमें लिफ्ट के सिविल वर्क का काम भी शामिल था। मूल ठेकेदार ऐश्वर्या एसोसिएट भोपाल को 13 देयकों में 2.41 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें लिफ्ट के सिविल वर्क के लिए 4.50 लाख रुपये भी शामिल थे। 24 अप्रैल 2018 को 600 किलो क्षमता वाली लिफ्ट लगाने के लिए 10 लाख रुपये की अलग से स्वीकृति दी गई और यह काम मेसर्स नवीन चौहान को मिला, जिसका भुगतान भी किया गया। सबसे बड़ी अनियमितता तब सामने आई जब 27 जून 2023 को एक और लिफ्ट लगाने के लिए 11.48 लाख रुपये की निविदा जारी की गई, जबकि पहले से ही एक लिफ्ट का काम हो चुका था। इसमें से 5.09 लाख रुपये का भुगतान भी नवीन चौहान को कर दिया गया है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ऑडिटोरियम का लोकार्पण 23 सितंबर 2018 को हो चुका था, फिर भी काम जारी रखा गया और ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। नियमों का उल्लंघन और जमीन का विवाद कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि ऑडिटोरियम का निर्माण उस जमीन पर किया गया है जो नगर पालिका के स्वामित्व की नहीं, बल्कि नजूल की भूमि है। उनका कहना है कि भूमि का विधिवत हस्तांतरण कराए बिना इतनी बड़ी राशि खर्च करना नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा, मूल ठेकेदार ऐश्वर्या एसोसिएट ने नवीन चौहान को उप-ठेकेदार (सबलेट) नियुक्त किया, जो मध्य प्रदेश नगरपालिका लेखा एवं वित्त नियम 2018 के खिलाफ है। बावजूद इसके, अध्यक्षीय परिषद ने 24 जुलाई 2023 को इस व्यवस्था को मंजूरी दे दी। इस बीच, नगर पालिका अध्यक्ष पंकज चौरे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें गलत बताया है और जल्द ही अपना पक्ष रखने की बात कही है।









