इटारसी। नर्मदापुरम जिले के छिंतपुरा में रविवार को एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा हो गया। प्रूफरेंज विस्तार के प्रस्तावित मुद्दे को लेकर 16 गांवों के लगभग 300 प्रतिनिधियों ने देवी खेड़ापति मैया के प्रांगण में एक महत्वपूर्ण बैठक की।
इस बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करते हुए, सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
जमीन, जंगल और आजीविका बचाने का संकल्प
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा कि वे अपनी पुरखों की जल, जंगल, जमीन और खेती-बाड़ी को नहीं छोड़ेंगे। प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर सरकार को प्रूफरेंज का विस्तार करना है, तो वह देश में कहीं और यह परियोजना शुरू कर सकती है। ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया कि केसला क्षेत्र एक आदिवासी विकासखंड है और पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद, सरकार ने ग्राम सभा की अनुमति के बिना इस तरह का निर्णय कैसे ले लिया। ग्रामीणों ने कहा कि 1968-69 से यहाँ कई बार विस्थापन हो चुका है, जिसका दर्द तीसरी पीढ़ी के लोग भी झेल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें फिर से हटाया गया, तो उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
सांसद के प्रस्ताव का कड़ा विरोध
बैठक में क्षेत्रीय सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा भारत के रक्षा मंत्री को रखे गए प्रूफरेंज विस्तार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया गया। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि सरकार इस प्रस्ताव को तुरंत वापस ले, वरना वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
आगे की रणनीति
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस समस्या को लेकर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस बैठक में सुककन, बंशीलाल, नर्मदा प्रसाद, प्रकाश यादव, राजेश यादव सहित कई अन्य गांवों के प्रतिनिधि और संगठनों के सदस्य मौजूद थे। इस आंदोलन में समाजवादी जनपरिषद और किसान आदिवासी संगठन केसला के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।









