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अग्रवाल भवन के पीछे बेखौफ बन गईं गुमटियां, मालिकों का पता नहीं

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इटारसी। शहर के अग्रवाल भवन के पीछे, सब्जी मंडी की ओर रातों रात एक दर्जन गुमटी तैयार हो गयीं। अग्रवाल भवन की दीवार से सटकर बनी इन गुमटियों के निर्माण की जिम्मेदारी न तो अग्रवाल भवन की समिति ले रही और ना ही नगर पालिका के जिम्मेदार। अब सवाल यह है कि क्या एलियन इनको बनाकर चले गये।

निडरता का आलम तो यह है कि सोशल मीडिया पर लगातार इसकी वैधता पर सवाल उठाये जाने के बावजूद रातों रात सभी में शटर भी लगा दिये गये। इन दुकानों के अवैध निर्माण ने प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, कि क्या कोई भी किसी भूमि पर ऐसे बेखौफ होकर गुमटी बना सकता है, वह भी इतनी बड़ी संख्या में, कतारबद्ध? क्योंकि एक साथ करीब एक दर्जन दुकानों का ढांचा खड़ा हो गया, मगर सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन दुकानों का कोई मालिक सामने नहीं आ रहा है।

विधायक करते हैं बैठक में विरोध

विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा हर त्रैमासिक बैठक में हाथ ठेला माफिया और गुमटी माफियाओं का विरोध करते और अधिकारियों को इनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश देते हैं, लेकिन अधिकारियों को उनके आदेश का पालन करने में न जाने क्यों संकोच होता है? विधायक जिन चीजों को बैठक में पसंद न करके आदेश देते हैं, वह शहर में हो रहा है, यह बड़ी चिंता का विषय है।

रातोंरात लगे शटर, गुमटी माफिया पर शक

इन दुकानों के निर्माण को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार विरोध दर्ज किया जा रहा था। इसके बावजूद, हैरानी की बात यह है कि विरोध के बाद रातोंरात सभी दुकानों में शटर लगा दिए गए। शहरवासी इसे गुमटी माफिया के बढ़ते दुस्साहस और प्रशासन की ढिलाई का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं। न तो अग्रवाल समाज इस निर्माण की जिम्मेदारी ले रहा है और ना ही नगर पालिका स्पष्ट कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में दुकानें किसकी अनुमति से बनी हैं। शहर में यह चर्चा है कि क्या प्रशासन की आंखों के सामने ये निर्माण अदृश्य शक्ति के संरक्षण में हो रहे हैं?

प्रशासन की चुप्पी पर तीखे सवाल

नागरिकों ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन पर लाचारी और मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले में दो प्रमुख सवाल खड़े हो रहे हैं,

  • वैधता का प्रश्न : यदि ये दुकानें वैध हैं, तो इनका निर्माणकर्ता या मालिक सामने क्यों नहीं आता और अनुमति के कागजात क्यों नहीं दिखाता?
  • कार्रवाई में विलंब : यदि ये दुकानें अवैध हैं, तो रातोंरात शटर लगने के बावजूद प्रशासन इन्हें ध्वस्त करने की कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है?

शहरवासियों का कहना है कि रातोंरात शटर लगने से यह साफ है कि इन अवैध कब्जों के पीछे किसी न किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है। लोगों ने तत्काल जांच और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने की मांग की है।

इनका कहना है…

हमें लगा था कि यह नजूल की भूमि है। लेकिन, हमारे पास एसडीएम साहब का पत्र आया था, कि यह हमारे अधिकारी क्षेत्र की है। हमने राजस्व विभाग की टीम भेजी थी, यह कौन बना रहा है, इसका कोई भी आइडिया नहीं है। इनको तोड़ा जाना है। हमने राजस्व विभाग को निर्देश दिये हैं।

श्रीमती ऋतु मेहरा, सीएमओ

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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