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मानहानि मामला : कांग्रेस के दो बड़े नेता कोर्ट से तलब

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इटारसी (नर्मदापुरम)। न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी, इटारसी सूर्यपाल सिंह राठौर की अदालत ने एक मानहानि के मामले में कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं, पंकज राठौर और राजकुमार उपाध्याय केलू, के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ मानहानि का अपराध बनता है।

आरोप : ‘संबल योजना’ का लाभ लेने का दावा

पार्षद राकेश जाधव ने यह परिवाद (क्र. 315/2019) 25 सितंबर 2019 को कोर्ट में दायर किया था। प्रतिवादीगण पंकज राठौर (तत्कालीन नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष, इटारसी) और राजकुमार उपाध्याय केलू (प्रवक्ता मप्र कांग्रेस कमेटी) ने 23 जुलाई 2019 को एक प्रेस वार्ता आयोजित कर उन पर संबल योजना का लाभ लेने का झूठा और मनगढ़ंत आरोप लगाया था।

मानहानि का दावा

परिवादी ने अदालत को बताया कि उन्होंने न तो कभी इस योजना का लाभ लिया है और न ही कोई आवेदन दिया है। बावजूद इसके, इन झूठे आरोपों को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई और उनकी भाभी को उनकी पत्नी बताकर प्रचारित करने से उनकी छवि खराब हुई।

कोर्ट का आदेश, सजा का प्रावधान और कानूनी स्थिति

न्यायालय ने परिवादी के बयान और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद पंकज राठौर और राजकुमार उपाध्याय केलू के खिलाफ मानहानि का अपराध पाए जाने पर संज्ञान लिया है। अगली सुनवाई के लिए दोनों कांग्रेस नेताओं को 26 नवंबर 2025 को अदालत में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया है।

  • सज़ा का प्रावधान (धारा 500) : भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक के साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
  • जमानत की स्थिति : मानहानि का यह अपराध जमानती (Bailable) और असंज्ञेय (Non-cognizable) होता है, जिसका अर्थ है कि पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार नहीं कर सकती है और अभियुक्त को थाने या न्यायालय से जमानत प्राप्त करने का अधिकार है।

मीडिया को मिली राहत

न्यायालय ने समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों के संपादकों/प्रबंधकों के खिलाफ मानहानि का पर्याप्त आधार नहीं पाए जाने पर उन्हें इस प्रकरण से मुक्त कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सूर्यपाल सिंह राठौर के इस आदेश को इटारसी में राजनीतिक बयानबाजी और जन-प्रतिनिधियों पर लगाए जाने वाले आरोपों के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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