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इटारसी की चयन कॉलोनी में साईं बाबा पंडाल में गरबा की धूम

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इटारसी। पुरानी इटारसी की चयन कॉलोनी स्थित साईं बाबा पंडाल में इस वर्ष साईं बाबा की प्रतिमा स्थापना का 16वाँ वर्ष मनाया जा रहा है। इस उपलक्ष्य में पंडाल में हर वर्ष की तरह कई प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें गरबा नृत्य आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

पंडाल में कॉलोनी की महिलाओं और बच्चों के साथ-साथ शहर के मशहूर गरबा ग्रुप लगातार अपनी शानदार प्रस्तुतियां दे रहे हैं। हाल ही में, मां बीजासेन देवी गरबा ग्रुप के बाद अप्सरा गरबा ग्रुप ने अपनी मनमोहक और आकर्षक प्रस्तुति से चयन कॉलोनी और पलकमती नगर से आए सैकड़ों भक्तों का दिल जीत लिया।

साईं धाम समिति के अध्यक्ष संतोष वर्मा ने बताया कि नवरात्रि पर्व पर डांडिया और गरबा नृत्य भी माँ की आराधना का एक रूप है, जिसे समिति द्वारा नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में जिले के सबसे लोकप्रिय गरबा ग्रुप की प्रस्तुति भी इस पंडाल में आयोजित की जाएगी, जिसका भक्तों को बेसब्री से इंतजार है।

यह आयोजन लगातार 16 वर्षों से कॉलोनी में भक्ति और उत्साह का माहौल बनाए हुए है, जिससे स्थानीय निवासियों में नवरात्रि का उत्साह चरम पर है।

डांडिया और गरबा: भक्ति और संस्कृति का संगम

गरबा और डांडिया केवल नृत्य नहीं हैं, बल्कि ये नवरात्रि पर्व पर माँ दुर्गा की आराधना और भारतीय संस्कृति के जीवंत प्रदर्शन का एक अभिन्न अंग हैं। ये नृत्य गुजरात से उत्पन्न हुए हैं, लेकिन अब पूरे देश में, खासकर नवरात्रि के दौरान, बहुत उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

  • भक्ति और समर्पण: गरबा (जो कि ‘गर्भदीप’ से लिया गया है) नृत्य माँ दुर्गा के चारों ओर किया जाता है। यह जीवन चक्र और गर्भ में पल रही शक्ति का प्रतीक है। भक्त इस नृत्य के माध्यम से माँ दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं।
  • शक्ति का आह्वान: डांडिया, जिसे ‘स्टिक डांस’ भी कहते हैं, में इस्तेमाल होने वाली रंगीन छड़ियाँ (डांडिया) माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध में इस्तेमाल होने वाली तलवारों का प्रतीक मानी जाती हैं। भक्त अपनी छड़ियों को टकराकर बुराई पर अच्छाई की विजय का जश्न मनाते हैं और शक्ति का आह्वान करते हैं।
  • सामुदायिक जुड़ाव: ये नृत्य सभी उम्र के लोगों को एक साथ लाते हैं। विभिन्न पीढ़ियों के लोग एक ही धुन और ताल पर नाचते हैं, जिससे सामुदायिक एकता और सौहार्द बढ़ता है।
  • सांस्कृतिक पहचान: ये नृत्य भारतीय लोक संगीत, पारंपरिक पोशाकों (जैसे चनिया-चोली और केडिया) और आभूषणों को प्रदर्शित करते हैं, जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलता है।

डांडिया और गरबा वस्तुतः भक्ति, ऊर्जा और उल्लास से भरे हुए उत्सव हैं जो नवरात्रि के नौ दिनों को एक विशेष रंग प्रदान करते हैं।क्या आप इटारसी में किसी और आगामी धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम की जानकारी चाहते हैं?

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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