इटारसी। धर्म और संस्कृति के रंगों में रंगी इटारसी नगरी में इन दिनों रासलीला महोत्सव का उल्लास छाया हुआ है। इसी क्रम में आज, श्री द्वारिकाधीश मंदिर परिसर में, भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा के साथ फूलों की होली खेलकर ब्रज की सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत अनुभव किया। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ब्रज की प्रेममयी संस्कृति की झलक थी, जहां भक्ति और आनंद का अद्भुत मेल देखने को मिला।
नगर पालिका परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में सैंकड़ों भक्त शामिल हुए, जिन्होंने फूलों की वर्षा में सराबोर होकर दिव्यता का अनुभव किया। इस दौरान नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पंकज चौरे और पार्षद श्रीमती मनीषा अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार सुश्री मंजू ठाकुर ने भी श्रीकृष्ण-राधा के साथ फूलों की होली खेलकर महोत्सव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
फूलों की वर्षा और नृत्य का समां
श्री बालकृष्ण लीला संस्थान, वृंदावन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए मंचन ने ब्रज की होली के वास्तविक स्वरूप को साकार किया। कलाकारों ने जब ‘आज बिरज में होली रे रसिया’ गीत पर नृत्य शुरू किया, तो पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से झूम उठा। गोपियों और श्रीकृष्ण-राधा का यह नृत्य प्रेम, मस्ती और समर्पण के भावों को दर्शाता है, जो ब्रज संस्कृति का मूल आधार हैं। ब्रज की होली में रंगों के स्थान पर फूल, गुलाल और प्रेम का भाव प्रमुख होता है, जिसका दर्शन इटारसी के भक्तों को भी मिला।
मयूर नृत्य और सगाई का प्रसंग
ब्रज के वातावरण को पूर्णता देते हुए, भक्तों ने मयूर नृत्य का भी आनंद लिया। यह नृत्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मयूर (मोर) की छटा को दर्शाता है और ब्रज की प्रकृति से उनके गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, लीला मंचन में श्री राधारानी संग श्रीकृष्ण की सगाई के अलौकिक प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया। यह प्रसंग ब्रज की उन परंपराओं का हिस्सा है जो श्रीकृष्ण और राधा के शाश्वत प्रेम को दर्शाती हैं।
ब्रज में उत्सव और भक्ति जीवन का अभिन्न अंग हैं, और यह रासलीला महोत्सव इटारसी में उसी शांति, आनंद और माधुर्य के भाव को प्रवाहित कर रहा है। इटारसी में यह महोत्सव न केवल धार्मिक उत्साह पैदा कर रहा है, बल्कि यहां के लोगों को ब्रजभूमि की सांस्कृतिक विरासत और उसकी मधुर भक्ति परंपरा से जुडऩे का एक अनूठा अवसर भी प्रदान कर रहा है।









