- पंकज पटेरिया, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार, भोपाल

राजधानी भोपाल के पुराने और अति व्यस्ततम इलाके, सोमवारा में स्थित भव्य कर्फ्यू माता मंदिर की सिद्धि और प्रसिद्धि की चर्चा अब चारों दिशाओं में हो रही है। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भोपाल के नागरिकों के धार्मिक उत्साह और संघर्ष की एक जीवंत कहानी भी कहता है।
साल भर यहां श्रद्धालुओं और भक्तों का हुजूम लगा रहता है। विशेष रूप से दोनों नवरात्रि के दौरान यहां एक बड़ा मेला जैसा दृश्य होता है। दूर-दूर से भक्तजन अपनी मनौतियां पूरी होने पर हाजिरी देने, पूजा-अर्चना करने और अपनी मनौती अर्पित करने यहां आते हैं।
मंदिर के नाम के पीछे का संघर्षमय इतिहास
लगभग चार दशक पहले, इस स्थान पर एक छोटी सी मढिय़ा हुआ करती थी, जहां भक्तजन जल अर्पित कर पूजन करते थे। यह क्षेत्र घनी गहमागहमी और भीड़-भाड़ वाला बाजार होने के कारण सभी वर्गों के लोगों का यहां आना-जाना होता था।
नियमित रूप से आने वाले भक्तों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया कि जनसहयोग से माता जी के इस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाए। इस शुभ कार्य की शुरुआत होते ही धर्मपरायण लोगों में इसमें अपनी-अपनी आहुति देने की होड़ लग गई, और देखते ही देखते यह एक जन-आंदोलन बन गया।
यह घटना अश्विन मास, सन् 1981 की है। जयपुर से बुलाई गई राज राजेश्वरी मां देवी की भव्य विग्रह वाली प्रतिमा की शास्त्रोक्त विधान से स्थापना की जा रही थी। तभी तात्कालिक सरकार के दौर में, शुरू से इस पावन कार्य का विरोध कर रहे प्रशासन के अधिकारियों की गाड़ी, कर्ण कर्कश हॉर्न बजाती हुई पहुँची। भारी पुलिस बल ने समूचे इलाके की घेराबंदी कर दी, लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया। इसी घटना के कारण यह मंदिर बाद में ‘कर्फ्यू माता मंदिर’ के नाम से विख्यात हो गया।
धर्म के आगे प्रशासन ने टेके घुटने
कर्फ्यू और गिरफ्तारी के बाद भी लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। दूने उत्साह और ऊर्जा से लोग मां की सेवा में जुटे रहे। आखिरकार, धर्म के प्रति इस अटूट अनुराग के सामने तात्कालिक प्रशासन को झुकना पड़ा। रात 3 बजे बंदी बनाए लोगों को जेल से रिहा कर दिया गया। सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में देवी माँ की भव्य प्रतिमा की स्थापना की गई। जानकारी के अनुसार, पंडित श्रवण अवस्थी, बाबूलाल सोनी सहित अनेक धर्मानुरागी लोगों ने इस महायज्ञ में अपना अविस्मरणीय योगदान दिया।
अद्भुत वास्तुकला और स्वर्णिम आभा
मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है, जो दूर से ही भक्तों को आकर्षित करती है।
- स्वर्ण मंदिर : मंदिर में स्वर्ण कलश और बड़े स्तर पर स्वर्ण का कार्य हुआ है, जिसके कारण इसे स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है।
- चाँदी के आकर्षण : प्रवेश द्वार लगभग 130 किलोग्राम चाँदी से निर्मित है। इसके अतिरिक्त, मंदिर में 18 किलोग्राम की एक छोटी प्रतिमा और 21 किलोग्राम का एक चाँदी का सिंहासन भी स्थापित है।
- अखंड ज्योति : यहां एक घी और एक तेल की दो अखंड ज्योतियाँ अलौकिक प्रकाश से निरंतर जगमगाती रहती हैं।
भक्तजन यहां एक नारियल पर अपनी अर्जी रखकर मनौती के रूप में माँ के चरणों में अर्पित करते हैं। - नवरात्रि के दिनों में मंदिर रात्रि 12 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है। यह मान्यता है कि माँ की कृपा से यहाँ आने वाला कोई भी श्रद्धालु कभी खाली झोली नहीं जाता; उनकी हर मुराद पूरी होती है।
आप भी जाइए और कर्फ्यू माता जी के दर्शन कर, उनके आशीर्वाद से धन्य होइए।
जय माता कर्फ्यू माता जी की।
नर्मदे हर।








