इटारसी। आज 5 अक्टूबर, रविवार को मध्य प्रदेश आदिवासी युवा संघ द्वारा वीरांगना रानी दुर्गावती के जयंती दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संघ के सदस्यों ने इस अवसर पर रानी के शौर्य, बलिदान और नारी शक्ति को याद करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।
रानी दुर्गावती के गौरवशाली इतिहास का स्मरण
मध्यप्रदेश आदिवासी युवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष आकाश कुशराम ने रानी दुर्गावती के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रानी का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को चंदेल राजा कीरत राय (कीर्तिसिंह चंदेल) के परिवार में कालिंजर के किले में हुआ था। दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया।
आकाश कुशराम ने उस गौरवशाली वंश का उल्लेख किया, जिससे रानी का संबंध था, यह वही चंदेल राजवंश था जिसने राजा विद्याधर के नेतृत्व में महमूद गजनबी को युद्ध में खदेड़ा था और विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के कंदारिया महादेव मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि इसी मान-सम्मान और शौर्य के माहौल में पली-बढ़ी कन्या दुर्गावती ने बचपन से ही अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी।
साहस और नारी शक्ति की प्रेरणा
इस अवसर पर प्रदेश संरक्षक एवं युवा पार्षद राहुल प्रधान ने रानी दुर्गावती के जीवन को साहस, शौर्य और नारी शक्ति के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि रानी ने अपने जीवन में 14 वर्षों तक सफलतापूर्वक स्वतंत्र शासन किया, जो उनकी कुशल प्रशासक क्षमता का प्रमाण है।
प्रधान ने जोर देकर कहा कि रानी दुर्गावती भारत की उन महानतम वीरांगनाओं की अग्रिम पंक्ति में आती हैं, जिन्होंने मातृभूमि और आत्मसम्मान की रक्षा हेतु अपने प्राणों का बलिदान दिया। कालिंजर के राजा कीरत सिंह की पुत्री और गोंड राजा दलपत शाह की पत्नी रानी दुर्गावती ने अपने विशाल राज्य पर न केवल कुशल शासन किया, बल्कि अकबर और मालवा के शासक बाजबहादुर जैसे शत्रुओं की गिद्ध दृष्टि से भी अपने राज्य की रक्षा के लिए अनेक युद्ध लड़े और विजय प्राप्त की।
जबलपुर में है समाधि स्थल
मध्य प्रदेश आदिवासी युवा संघ के जिला अध्यक्ष राघवेंद्र उइके ने रानी के बलिदान स्थल की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में जबलपुर जिले में जबलपुर और मंडला रोड पर स्थित बरेला के पास नर्रई नाला वह ऐतिहासिक स्थान है, जहां रानी दुर्गावती वीरगति को प्राप्त हुई थीं। इसी स्थान के पास बरेला में उनका समाधि स्थल है, जहाँ प्रतिवर्ष 24 जून को बलिदान दिवस पर लोग उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।
इस जयंती अवसर को सफल बनाने के लिए आए सामाजिकगणों, मातृशक्ति और युवा साथियों का मध्यप्रदेश आदिवासी युवा संघ के जिला प्रभारी संजय युवने द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान पवन मर्सकोले, संजय युवने, सचिन प्रधान, राहुल कुबरे, अखिलेश काकोडिया, सुनील परते, प्रशांत उइके, जियालाल धुर्वे, भगवान दास सल्लाम, कृष्णा मर्सकोले सहित मातृशक्तियों में किरण यादव, स्नेहा भल्लवी, रेखा और पिंकी धुर्वे भी उपस्थित रहीं।









