इटारसी। भगत सिंह नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा समारोह के तृतीय दिवस पर आचार्य विनय कृष्ण शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि संसार सागर में कोई भी मनुष्य कितना ही बलवान, बुद्धिमान, धनवान, या दानवीर क्यों न हो, उसमें अहंकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि अहंकार बुद्धि को नष्ट कर देता है।
राजा बलि के प्रसंग से दिया ज्ञान
व्यास गादी से कथा का विस्तार करते हुए आचार्य विनय शास्त्री ने राजा बलि प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा बलि बहुत बड़े धनवान, बुद्धिमान और दानवीर थे, जिसका उन्हें बड़ा गुमान (अहंकार) था। इसी अहंकार के चलते वह अपने दरबार में वामन अवतार धारण कर पहुंचे भगवान श्रीहरि को पहचान नहीं पाए।
भगवान ने राजा बलि से तीन पग जमीन का दान मांगा। राजा ने सहजता से दान स्वीकार कर लिया, लेकिन भगवान ने राजा का अहंकार दूर करने के लिए एक पैर में पृथ्वी और दूसरे में आसमान नाप लिया। जब भगवान ने पूछा कि तीसरा पैर कहाँ रखें, तब राजा को अपने अभिमान पर पश्चाताप हुआ। उन्होंने भगवान से कहा, तीसरा पैर मेरे सर पर रखकर मेरे अहंकार को दूर कीजिए।
आचार्य श्री ने संदेश दिया कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि किसी भी व्यक्ति को अहंकारी नहीं होना चाहिए, क्योंकि अहंकार हमारी सफलताओं को मिटाने का काम करता है और हमें ईश्वर प्राप्ति से भी वंचित रखता है।
भक्ति में एक कदम बढ़ाने का आह्वान
इसके साथ ही, कथा व्यास ने कर्दम ऋषि प्रसंग के माध्यम से श्रोताओं से आह्वान किया, ‘आप ईश्वर भक्ति में एक कदम आगे बढ़ाइए, भगवान सौ कदम आगे बढ़ाकर आपका उद्धार करेंगे।’ इन ज्ञानपूर्ण प्रसंगों के साथ ही संगीतमय भजनों की प्रस्तुति भी दी गई।
आचार्य श्री का सम्मान
कथा के प्रारंभ में नगर पालिका अध्यक्ष पंकज चौरे, सभापति राकेश जाधव, पार्षद कुंदन गोर, अमित विश्वास, जिम्मी केथवास, शुभम गोर, और कमलेश गोरा आदि ने मुख्य यजमान एवं कार्यक्रम संयोजक धीरू सिंह भदौरिया के साथ मिलकर आचार्य श्री विनय कृष्ण शास्त्री का स्वागत सम्मान किया। कथा में भगत सिंह नगर, मेहरा गांव सहित अनेक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रोतागण भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।









