इटारसी। नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर कृष्ण गोपाल तिवारी ने वन विभाग और पुलिस विभाग को संयुक्त रूप से संगठित वन अपराधों, अवैध कटाई, अतिक्रमण, उत्खनन और परिवहन को विफल करने का सख्त निर्देश दिया है। उन्होंने वन्य प्राणियों को विद्युत करंट से बचाने के लिए विद्युत लाइनों की ट्रैपिंग को भी सख्ती से रोकने का आदेश दिया है। कमिश्नर ने ये निर्देश वन विभाग की संभागीय टास्क फोर्स समिति की बैठक में दिए।
संगठित अपराधों पर संयुक्त कार्रवाई
कमिश्नर श्री तिवारी ने निर्देश दिए कि वन विभाग एवं पुलिस विभाग मिलकर आदतन वन एवं वन्य प्राणियों के अपराधियों की सूची तैयार करें और साझा करें। बैठक में उपस्थित पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला ने कहा कि आदतन वन अपराधियों के वाहन जब्त करने के साथ ही ऐसे अपराधियों और तस्करों को तत्काल जेल भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लापरवाही न बरतने और वन अपराधियों को बचने का मौका न देने की चेतावनी दी।
वन्यजीव सुरक्षा : विद्युत ट्रैपिंग पर रोक वन्य प्राणियों को विद्युत करंट से बचाने के लिए कमिश्नर ने विद्युत विभाग और वन विभाग को संयुक्त रूप से गश्त करने, विद्युत लाइनों की ट्रैपिंग होने से रोकने और लाइनों का समुचित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वन व्यवस्थापन और अतिक्रमण कमिश्नर ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 में अनुसूचित वन खंडों में धारा 5 से 19 तक की कार्रवाई समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर नर्मदापुरम सुश्री सोनिया मीना ने बताया कि वन व्यवस्थापन से संबंधित कोई भी आवेदन लंबित नहीं है और नए प्रस्ताव लेने के लिए शीघ्र ही वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। कमिश्नर ने उन वन भूमियों पर भी जानकारी ली जो अधिसूचित (नोटिफाइड) होने के बावजूद वन विभाग के कब्जे में नहीं हैं और अतिक्रमित हैं। उन्होंने नियम अनुसार अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
संयुक्त भ्रमण और सख्त कार्रवाई कमिश्नर श्री तिवारी ने वन विभाग के एसडीओ और पुलिस विभाग के एसडीओपी को प्रति माह फॉरेस्ट एरिया में शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कलेक्टर्स और वन मंडलाधिकारियों को भी संयुक्त रूप से वन क्षेत्र का भ्रमण करने और आदतन वन्य अपराधियों पर सख्त संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को प्राथमिकता से हटाने के निर्देश भी दिए गए।
बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं
कमिश्नर की चिंता के बावजूद, पांडरी सर्किल-क्षेत्र वनमंडल के जंगल में बड़ा अवैध कटाई के मामले में लीपापोती के प्रयास जारी हैं। पिछले वर्षों में तवानगर वनमंडल की छीपीखापा बीट में ?2.82 करोड़ मूल्य के 1242 सागौन और 38 सतकटा के पेड़ अवैध रूप से काटे गए। शुरुआत में, डीएफओ ने कटे पेड़ों की संख्या केवल 356 बतायी। पीसीसीएफ विभाष ठाकुर के निर्देश पर भोपाल से उडऩदस्ते की जांच के बाद असली स्थिति सामने आई। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बड़े नुकसान के लिए डीएफओ और सीसीएफ जैसे वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत, चार छोटे कर्मचारियों वनपाल अजय श्रीवास्तव और तीन वनरक्षकों पर करोड़ों रुपए की वसूली का नोटिस जारी कर दिया गया है।
सीसीएफ अशोक चौहान ने डीएफओ से एक साल तक अवैध कटाई पर कार्रवाई न करने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। वन विभाग के नियमों के अनुसार, 100 से अधिक वृक्षों की कटाई पर डीएफओ और सीसीएफ भी जिम्मेदार होते हैं, लेकिन इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है।








