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नर्मदापुरम : जहां ‘राम-बोलो’ की गूंज में होता है समाज का कल्याण

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  • पुरानी इटारसी बना जनकपुरी, 41 वर्षों की अटूट आस्था और नि:स्वार्थ सेवा का महायज्ञ

इटारसी। नर्मदापुरम जिले के हृदय, पुरानी इटारसी, में इन दिनों स्वर्गिक आभा छाई हुई है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम, नि:स्वार्थ सेवा और सामाजिक समरसता का महायज्ञ है, श्रीराम विवाह सह नि:शुल्क सामूहिक विवाह का भव्य आयोजन। यह उत्सव, जो प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर होता है, अब अपने 41 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

पुरानी इटारसी को किसी नववधू की तरह सजाया गया है, और नेशनल हाईवे 69 पर स्थित रोड ओवरब्रिज की रंगीन विद्युत श्रंखलाएं मानो आकाशगंगा को धरती पर उतार लाई हैं, जो इस उत्सव की भव्यता को दर्शाती हैं।

नि:स्वार्थ सेवा का दार्शनिक आधार

इस अनूठे आयोजन की आधारशिला श्री देवल मंदिर काली समिति है, जिसका मूल मंत्र है, ‘बिना किसी पद, बिना किसी स्वार्थ के, केवल रामजी के भरोसे’। समिति के सैंकड़ों सदस्य निस्वार्थ भाव से, बिना किसी व्यक्तिगत बुलावा या पद की अपेक्षा के, अपना श्रम, दान और सहयोग अर्पित करते हैं। उनका अभिवादन का तरीका भी उनकी विचारधारा को दर्शाता है, वे एक-दूसरे को मिलते समय केवल ‘राम बोलो’ कहते हैं, जो ईश्वर में संपूर्ण समर्पण का प्रतीक है। इस महोत्सव का प्रबंधन स्वयं को श्री राम का सेवक मानकर काम करने वाली समिति द्वारा किया जाता है।

यह आयोजन भारतीय संस्कृति की उस नि:स्वार्थ सेवा भावना का प्रतीक है, जहां मनुष्य स्वयं को नहीं, बल्कि रामजी के कार्य को प्रधानता देता है। ओरछा के बाद सबसे बड़ा कन्यादान यज्ञ माना जाता है कि ओरछा के ऐतिहासिक श्रीराम विवाह के बाद, मध्यप्रदेश में यह सबसे बड़ा और सबसे प्रतिष्ठित सामूहिक कन्यादान यज्ञ है। यह परंपरा 1984 में शुरू हुई थी और पिछले चार दशकों में, लगभग ढाई हजार सौभाग्यशाली जोड़ों ने यहां अग्नि को साक्षी मानकर अपनी नई यात्रा शुरू की है। माता-पिता इसे अपना परम सौभाग्य मानते हैं कि उनके बच्चों का विवाह उसी शुभ मुहूर्त में हो रहा है, जब परमपिता श्रीराम विवाह के बंधन में बंधे थे।

वर्ष 2025 का मांगलिक कार्यक्रम

इस वर्ष (2025) यह महोत्सव 20 से 26 नवंबर तक अपनी स्वर्णिम छटा बिखेरेगा। विवाह के लिए अब तक 19 जोड़ों का पंजीयन हो चुका है। महोत्सव का चरमोत्कर्ष मंगलवार, 25 नवंबर को होगा। सुबह 9 बजे कन्या भोज एवं भंडारा आयोजित होगा। शाम को श्री द्वारिकाधीश मंदिर, तुलसी चौक से भगवान श्री रामजी और सभी दूल्हा राजाओं की भव्य बारात बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों की दिव्य गूंज के साथ रवाना होगी। यह 3 किलोमीटर की शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए श्री देवल मंदिर में निर्मित जनकपुरी पहुंचेगी।

रात्रि में आध्यात्मिक प्रवचन, देवी जागरण और बारात के स्वागत के बाद, रात 11 बजे जयमाला एवं प्रीतिभोज होगा। महोत्सव का सबसे पवित्र क्षण रात 12 बजे होगा, जब पाणिग्रहण संस्कार संपन्न होगा और प्रभु श्रीराम के साथ सभी नवयुगल अग्नि को साक्षी मानकर जीवन भर के लिए एक-दूसरे के हो जाएंगे। अगले दिन, बुधवार, 26 नवंबर को सुबह 7 बजे विदाई समारोह के साथ यह भावुकतापूर्ण और शुभ आशीर्वादों का महायज्ञ संपन्न होगा।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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