इटारसी। ग्राम बोरतलाई में मंगलवार को उस समय दहशत फैल गई जब एक ग्रामीण के घर के आंगन में रखी बोरियों के नीचे एशिया के सबसे विषैले सर्पों में से एक, रसेल वाइपर की उपस्थिति की पुष्टि हुई। इस सर्प के हेमोटॉक्सिक जहर की भयावहता को देखते हुए, वन विभाग और सर्पमित्रों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया, जिससे क्षेत्र में एक बड़ा जानलेवा हादसा टल गया।
मौत की भयावहता, रसेल वाइपर का जहर
रसेल वाइपर को एशिया महाद्वीप के सबसे अधिक जहरीले सर्पों में गिना जाता है। इसका विष हेमोटॉक्सिक (रक्त विषाक्त) होता है, जो शिकार के शरीर में प्रवेश करते ही रक्त कोशिकाओं को नष्ट करना, आंतरिक रक्तस्राव और गंभीर ऊतक क्षति पहुंचाना शुरू कर देता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह शिकार के किडनी फेलियर और भयावह मृत्यु का कारण बन सकता है। बोरियों के नीचे करीब 4 फीट लंबा यह विषैला सर्प किसी भी क्षण एक बड़ी अनहोनी को अंजाम दे सकता था।
सर्पमित्रों का साहसिक रेस्क्यू
बोरतलाई निवासी अभिषेक बरखने ने जब अपने आंगन में बोरियों के नीचे इस सर्प को देखा, तो उन्होंने तत्काल सर्पमित्र अभय चौरे को सूचना दी। वनपरिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक शर्मा के निर्देशन और सर्प विशेषज्ञ अभिजीत यादव के मार्गदर्शन में, सर्पमित्रों की टीम जिसमें अभय चौरे, मोहित मेहरा और सचिन दुलारे शामिल थे, बिना विलंब किए मौके पर पहुंची। टीम ने सूझबूझ और विशेषज्ञता का परिचय देते हुए, अत्यंत सावधानी से बोरियों के नीचे छुपे इस अत्यंत विषैले सांप को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला।
सर्पमित्रों के इस साहसिक कार्य ने ग्रामीणों को एक आसन्न खतरे से मुक्ति दिलाई। रेस्क्यू के बाद, रसेल वाइपर को वनपरिक्षेत्र में एक सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास के लिए छोड़ दिया। सर्पमित्रों ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे किसी भी विषैले जीव को देखने पर खुद से पकडऩे की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत विशेषज्ञ या वन विभाग को सूचना दें।









