- प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने कहा- ‘गीता ज्ञान, भक्ति और कर्म का अद्भुत संगम’
इटारसी। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में आज, 1 दिसंबर को गीता जयंती के पावन अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आध्यात्मिक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत के संरक्षण में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद् गीता के गहन जीवन दर्शन से जोड़ना था।
ज्ञान, भक्ति और कर्म का अद्भुत मिश्रण
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ द्वारा ज्ञान की देवी माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और पूजन से हुआ, जिसके पश्चात कुमारी अर्चना धुर्वे ने मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में सर्वप्रथम छात्र रितेश धुर्वे ने श्रीमद्भगवद् गीता के पंद्रहवें अध्याय के श्लोकों का सस्वर वाचन किया और उनके अर्थ को विस्तार से समझाया।
कुमारी साक्षी, सिया और नेहा ने “हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी” भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।कुमारी भावना राठौर ने गीता के महत्व और उसके व्यवहारिक अनुप्रयोगों पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया, जबकि कुमारी अर्चना धुर्वे ने “ओ कान्हा अब तो मुरली की…” भजन गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जीवन की समस्याओं का हल गीता में
प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि “श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन ही अनुकरणीय है।” उन्होंने गीता के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि गीता का उपदेश ज्ञान, भक्ति और कर्म का अद्भुत सम्मिश्रण है। राजनीति, समाज और जीवन की समस्त समस्याओं का हर सूत्र गीता में उपलब्ध है। अतः, उन्होंने आज के युवाओं को इस पवित्र ग्रंथ को समझकर जीवन में उतारने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार से समस्त स्टाफ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सतीश ठाकरे ने किया, जबकि डॉ. राधा आशीष पांडे ने आभार व्यक्त किया।









