इटारसी। केसला ब्लॉक के जंगल में बसे तिलकसिंदूर में ग्रामीणों ने जल संकट से निपटने और सिंचाई की समस्या को खत्म करने के लिए एक शानदार पहल की है। नव क्रांति जन कल्याण समिति पतलईकला के नेतृत्व में, ग्रामीणों ने एकजुट होकर जंगल के पास बहती पहाड़ी नदी पर श्रमदान करके एक प्रभावी बोरी बंधान, रेत की बोरियों से बना अस्थायी बांध तैयार किया है।
करीब 40-50 रेत से भरी बोरियों का उपयोग करके बनाए गए इस बंधान से नदी का पानी रोका जा सकेगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ेगा और गांव में सिंचाई की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकेगी। जल संरक्षण का स्थायी समाधान इस सामूहिक पहल के दौरान जन अभियान परिषद केसला के ब्लॉक समन्वयक विवेक मालवीय उपस्थित रहे। उन्होंने ग्रामीणों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा, ऐसी सामूहिक पहलें जल संरक्षण के स्थायी समाधान प्रस्तुत करती हैं और ग्रामों के जल स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पुरानी पद्धति की ओर लौटना समय की मांग
परामर्शदाता राजेश मालवीय ने जल संचयन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राचीन समय में कुओं, बावड़ी, तालाब आदि सहज, सरल और टिकाऊ संचयन पद्धतियां थीं, जो अब विलुप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा, समय की मांग है कि हमें फिर से पुरानी पद्धति की ओर लौटना होगा। मौजूदा स्थितियों में, यहां जल संचयन के लिए बोरी बंधान करना जरूरी हो गया था। सामुदायिक जागरूकता का प्रतीक नवांकुर संस्था के अध्यक्ष राकेश भट्ट ने कार्यक्रम का मार्गदर्शन करते हुए जोर दिया कि बोरी बंधान केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि सामुदायिक जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास ही आगे चलकर बड़े जल-संकट को टालने में मदद करते हैं।
उल्लेखनीय सहयोग और एकजुटता
इस सफल अभियान में मुख्य आयोजक संस्थाओं के साथ सहयोगी संस्था के रूप में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति तीखड़ ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया। समिति के अध्यक्ष विक्रम चौधरी तथा सदस्य हर्ष पटैल, सतेन्द्र सिंह कुशवाह और रोहित बकोरिया ने सक्रिय रूप से श्रमदान किया और ग्रामीणों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि, गांव की एकजुटता ही ऐसे अभियानों की सफलता का आधार होती है। तिलक सिंदूर के इस प्रयास से अन्य ग्रामीण क्षेत्रों को भी जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने की प्रेरणा मिलेगी।









